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Economy Update: दिसंबर में जीएसटी संग्रह ₹1.75 लाख करोड़ के पार; भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और आयात राजस्व में 19% का उछाल

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द लोकतंत्र : भारतीय अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2026 का अभिनंदन सकारात्मक वित्तीय संकेतों के साथ किया है। 1 जनवरी 2026 को जारी नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह उछाल न केवल घरेलू खपत में तेजी को दर्शाता है, अपितु टैक्स अनुपालन प्रणाली की सटीकता और जीएसटी काउंसिल द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों की सफलता का भी परिचायक है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयात राजस्व में हुई भारी बढ़ोतरी ने इस महीने कुल संग्रह को नई ऊंचाई प्रदान की है।

जीएसटी संग्रह का विस्तृत खाका: प्रमुख घटक एवं वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-दिसंबर की अवधि में कुल जीएसटी कलेक्शन ₹16.5 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 8.6% अधिक है।

  • आयात राजस्व का प्रभुत्व: दिसंबर महीने की सबसे बड़ी हाइलाइट आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व रही, जिसमें 19.7 प्रतिशत की प्रचंड तेजी देखी गई। इस अकेले घटक ने कुल राजस्व में 51,977 करोड़ रुपये का योगदान दिया।
  • घरेलू बाजार की स्थिति: स्थानीय जीएसटी राजस्व में भी 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो ₹1.22 लाख करोड़ रहा। हालांकि इंटीग्रेटेड GST (IGST) में मामूली गिरावट देखी गई, किंतु सेंट्रल GST (CGST) और स्टेट GST (SGST) के बेहतर प्रदर्शन ने संतुलन बनाए रखा।

दिसंबर 2025: राजस्व की सांख्यिकीय झांकी

जीएसटी आंकड़ों के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि रिफंड प्रक्रिया में भी तेजी आई है।

विवरणराशि (करोड़ रुपये में)वार्षिक वृद्धि/कमी
टोटल GST कलेक्शन1,74,000 (लगभग)+6.1%
नेट GST रेवेन्यू1,45,000+2.2%
आयात (Import) GST51,977+19.7%
GST रिफंड28,980+31%
कम्पेनसेशन सेस4,238-64.69%

जीएसटी काउंसिल की भूमिका और भविष्य का अनुमान

  • आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जीएसटी प्रणाली का सरलीकरण और प्रौद्योगिकी का उपयोग इस सफलता के मूल में है। जीएसटी काउंसिल द्वारा समय-समय पर दिए गए स्पष्टीकरण और टैक्स चोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ने राजस्व के आधार को मजबूत किया है। मुआवजा सेस (Compensation Cess) में 64 प्रतिशत से अधिक की भारी कमी यह संकेत देती है कि राज्यों की निर्भरता और सेस व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ रहा है।

निष्कर्षतः, वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे त्रैमासिक के अंत तक ₹16.5 लाख करोड़ का संग्रह होना यह संकेत है कि सरकार अपने वार्षिक राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने की सही राह पर है। आयात में तेजी और घरेलू व्यापार में स्थिरता आने वाले बजट 2026 के लिए एक मजबूत पृष्ठभूमि तैयार करती है। यह डेटा वैश्विक बाजार को भारत की मजबूत आंतरिक मांग का स्पष्ट संदेश देता है।

Team The Loktantra

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