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‘आदि से अनादि’ साहित्य उत्सव का भव्य समापन, राज्यपाल बोले- डिजिटल युग में भी किताबों की ताकत बरकरार

The 'Aadi Se Anadi' literary festival concludes grandly; the Governor says the power of books remains intact even in the digital age.

द लोकतंत्र/ रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि’ का समापन गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। समापन समारोह में रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल ने साहित्य, किताबों और प्रिंट मीडिया की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि डिजिटल और इंटरनेट के इस तेज़ दौर में भी साहित्य और प्रिंट मीडिया का महत्व कभी समाप्त नहीं हो सकता।

साहित्य व्यक्ति को संवेदनशील बनाता है – राज्यपाल रमेन डेका

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि साहित्य और कविता केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे समाज को दिशा देने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह संगीत के सात स्वर लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं, उसी तरह साहित्य विचारों के आदान-प्रदान के ज़रिये मनुष्य को सीखने, समझने और आत्मचिंतन का अवसर देता है। साहित्य व्यक्ति को संवेदनशील बनाता है और उसे एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने उत्सव के तीन दिनों के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच पर साहित्य, समाज, संस्कृति और जीवन से जुड़े कई गंभीर और समकालीन विषयों पर खुलकर संवाद हुआ। इस दौरान अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया और देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रकाशकों ने पुस्तकों का समृद्ध संग्रह प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोगों की किताबों के प्रति रुचि देखकर यह स्पष्ट होता है कि साहित्य का आकर्षण कम नहीं हुआ है।

साहित्य को गांव-गांव तक ले जाने की जरूरत

राज्यपाल ने यह भी कहा कि ऐसे साहित्य उत्सव केवल सरकारी आयोजनों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि समाज की भागीदारी से इन्हें गांवों और छोटे शहरों तक ले जाना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी छत्तीसगढ़ की रामायणकालीन संस्कृति, परंपरा और साहित्य से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का व्यापक प्रचार-प्रसार समय की आवश्यकता है, ताकि देश और दुनिया छत्तीसगढ़ की पहचान को बेहतर ढंग से समझ सके।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने शब्दों की शक्ति पर भी जोर दिया। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल दो शब्दों ने पूरे देश को जागृत कर दिया था। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज और राष्ट्र के हित में हो।

समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से साहित्यिक चेतना से जुड़ी रही है और भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी और नाट्य लेखक सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता अनुराग बसु, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Team The Loktantra

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