द लोकतंत्र : सनातन धर्म में समय की गणना का बहुत महत्व है। यहाँ कुछ समय खुशियों और जश्न के लिए होते हैं, तो कुछ समय ईश्वर की साधना और संयम के लिए। ऐसा ही एक समय है ‘खरमास’। हिंदू पंचांग के अनुसार, खरमास के एक महीने को शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।
अगर आप भी शादी-ब्याह, नए घर का निर्माण या कोई बड़ा बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि साल 2026 का दूसरा खरमास कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।
कब से कब तक है साल 2026 का दूसरा खरमास?
साल में दो बार खरमास लगता है। पहला खरमास जो 16 दिसंबर 2025 को लगा था, वह 14 जनवरी 2026 को खत्म हो चुका है। अब साल के दूसरे खरमास की बारी है:
- शुरुआत: 14 मार्च 2026
- समाप्ति: 13 अप्रैल 2026
- खगोलीय घटना: इस दौरान सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे। जैसे ही 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में आएंगे, खरमास समाप्त हो जाएगा और फिर से मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।
खरमास को क्यों माना जाता है अशुभ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो वे अपने गुरु की सेवा में लग जाते हैं। इस स्थिति में सूर्य का प्रभाव तो कम होता ही है, साथ ही गुरु बृहस्पति का तेज भी फीका पड़ जाता है। गुरु को विवाह, संतान और धन का कारक माना जाता है। जब गुरु और सूर्य दोनों ही कमजोर स्थिति में हों, तो उस समय किए गए मांगलिक कार्यों के सफल होने की संभावना कम रहती है।
पौराणिक कथा: क्यों थक जाते हैं सूर्य के घोड़े?
शास्त्रों में एक बड़ी ही रोचक कथा है। कहा जाता है कि सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। एक बार लगातार चलने की वजह से उनके घोड़े थक गए और उन्हें प्यास लगी। सूर्य देव उन्हें एक तालाब के पास ले गए, जहाँ दो खर (गधे) मौजूद थे।
सूर्य देव ने घोड़ों को आराम देने के लिए रथ में गधों को जोड़ दिया। गधों की चाल धीमी होने के कारण सूर्य की गति भी मंद पड़ गई और पृथ्वी पर तेज कम हो गया। इसीलिए इस एक महीने की अवधि को ‘खरमास’ कहा जाता है।
क्या न करें और क्या करें?
- वर्जित कार्य: इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार और नया बिजनेस शुरू करने जैसे काम नहीं करने चाहिए।
- क्या करें: खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ हो, लेकिन यह दान-पुण्य और आध्यात्मिक प्रगति के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और जरूरतमंदों को दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।
खरमास हमें रुकने और ईश्वर से जुड़ने का संदेश देता है। यह समय बाहरी भौतिक खुशियों के बजाय मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाने का है।

