द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को सदन में बोलने से रोके जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को एक विस्तृत पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उन्हें अपनी बात रखने से रोका गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
ओम बिरला को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि संसदीय परंपराओं और पूर्व लोकसभा अध्यक्षों के फैसलों के अनुसार, यदि कोई सांसद सदन में किसी दस्तावेज या पत्रिका का उल्लेख करता है, तो उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित करना और उसकी सामग्री की जिम्मेदारी लेना उस सदस्य का दायित्व होता है। उन्होंने लिखा कि यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही सदस्य को सदन में उस दस्तावेज का हवाला देने की अनुमति दी जाती है। इसके बाद उस पर जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी होती है, न कि स्पीकर की ओर से रोक-टोक करना।
‘जानबूझकर मुझे बोलने से रोका जा रहा’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें लोकसभा में बोलने से रोकना न केवल स्थापित संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि इससे यह गंभीर आशंका भी पैदा होती है कि उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर बोलने से जानबूझकर रोका जा रहा है। उन्होंने पत्र में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था और इस पर संसद में चर्चा लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है।
स्पीकर की भूमिका पर उठाए सवाल
अपने पत्र में राहुल गांधी ने यह भी लिखा कि लोकसभा अध्यक्ष सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं और उनकी संवैधानिक व संसदीय जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक सदस्य, विशेष रूप से विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, ताकि संसद में सार्थक बहस हो सके और लोकतंत्र मजबूत बने।
‘सरकार के दबाव में लिया गया फैसला’ का आरोप
कांग्रेस सांसद ने इस घटनाक्रम को संसदीय इतिहास की एक अभूतपूर्व घटना करार देते हुए आरोप लगाया कि पहली बार सरकार के इशारे पर स्पीकर को विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोकना पड़ा। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर धब्बा बताते हुए अपने कड़े विरोध को औपचारिक रूप से दर्ज कराया है। उनका कहना है कि अगर संसद में विपक्ष की आवाज को इस तरह दबाया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरनाक मिसाल साबित होगी।
सियासी हलकों में तेज हुई चर्चा
इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से अभी इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

