Advertisement Carousel
Spiritual

Vastu for Car: कार के डैशबोर्ड पर भूलकर भी न रखें ऐसी मूर्ति; सफर में हो सकता है बड़ा नुकसान, जानें सही नियम

The loktnatra

द लोकतंत्र : हम में से ज्यादातर लोग नई कार लेते ही सबसे पहले उसके डैशबोर्ड पर भगवान की मूर्ति या तस्वीर लगाते हैं। हमारा मानना होता है कि इससे भगवान की कृपा बनी रहेगी और हमारा सफर सुरक्षित रहेगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस श्रद्धा के साथ आप मूर्ति रख रहे हैं, वह वास्तु के हिसाब से सही है या नहीं?

वास्तु शास्त्र और जानकारों का कहना है कि कार में हर तरह की मूर्ति रखना शुभ नहीं होता। खासकर ‘ध्यान मुद्रा’ वाली मूर्तियां आपके सफर के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण।

क्यों न रखें ध्यान मुद्रा वाली मूर्ति?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, ध्यान में बैठी हुई मूर्तियां (जैसे ध्यान मग्न शिव जी या गणेश जी) शांति, स्थिरता और आत्मचिंतन का प्रतीक होती हैं। ध्यान का अर्थ है पूरी तरह से भीतर की ओर मुड़ जाना। वहीं, कार एक ‘गतिशील’ (Moving) वस्तु है जिसे चलाते वक्त ड्राइवर का पूरा ध्यान बाहर सड़क पर होना चाहिए।

माना जाता है कि ऐसी मूर्तियों का प्रभाव अनजाने में ड्राइवर के मन पर पड़ता है, जिससे उसे सुस्ती महसूस हो सकती है या उसकी एकाग्रता (Focus) कम हो सकती है। कार में हमेशा ऐसी ऊर्जा चाहिए जो आपको ‘अलर्ट’ और ‘सक्रिय’ रखे।

कौन सी मूर्ति है सबसे शुभ?

कार के लिए हमेशा ‘जागृत मुद्रा’ वाली मूर्ति या तस्वीर का चुनाव करना चाहिए।

  • आशीर्वाद मुद्रा: गणेश जी की ऐसी प्रतिमा जिसमें वे आशीर्वाद दे रहे हों या उनकी आंखें खुली हों, सबसे उत्तम मानी जाती है।
  • सतर्कता का प्रतीक: जागृत मुद्रा सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा का अहसास कराती है। यह ड्राइवर को मानसिक रूप से सतर्क रखती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है।

कार में मूर्ति लगाने के 5 जरूरी नियम

अगर आप अपनी कार में सुख-समृद्धि और सुरक्षा चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन जरूर करें:

  1. जगह का चुनाव: मूर्ति को डैशबोर्ड के बिल्कुल बीच में ऐसे रखें कि वह आपके ड्राइविंग विजन (सड़क देखने की क्षमता) को प्रभावित न करे। आपकी नजर बार-बार उस पर नहीं जानी चाहिए।
  2. शुद्धिकरण: मूर्ति स्थापित करने से पहले उसे गंगाजल से साफ करें और एक छोटी सी पूजा जरूर करें।
  3. खंडित मूर्ति से बचें: कभी भी टूटी हुई या धुंधली तस्वीर कार में न रखें। वास्तु में इसे भारी दोष माना जाता है जो नकारात्मकता लाता है।
  4. सजावट में सादगी: मूर्ति पर बड़ी माला या बहुत सारे फूल न चढ़ाएं। अचानक ब्रेक लगने पर ये चीजें गिरकर आपका ध्यान भटका सकती हैं।
  5. नियमित सफाई: कार की सफाई के साथ-साथ भगवान की मूर्ति की भी नियमित सफाई करें। धूल जमी हुई मूर्ति घर या वाहन में नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

कार में भगवान का होना हमें मानसिक मजबूती देता है, लेकिन वास्तु के सही नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। एक छोटी सी समझदारी आपके हर सफर को मंगलमय और सुरक्षित बना सकती है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

साधना के चार महीने
Spiritual

Chaturmas 2025: चार महीने की साधना, संयम और सात्विक जीवन का शुभ आरंभ

द लोकतंत्र: चातुर्मास 2025 की शुरुआत 6 जुलाई से हो चुकी है, और यह 1 नवंबर 2025 तक चलेगा। यह चार
SUN SET
Spiritual

संध्याकाल में न करें इन चीजों का लेन-देन, वरना लौट सकती हैं मां लक्ष्मी

द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में संध्याकाल यानी शाम का समय देवी लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। यह वक्त