द लोकतंत्र/ रायपुर : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में शामिल होकर बस्तर को भारत की सांस्कृतिक धरोहर का ‘आभूषण’ बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से यहां की लोकसंस्कृति, परंपराओं और विरासत को नया जीवन दे रही है। अमित शाह ने भरोसा जताया कि आने वाले पांच वर्षों में बस्तर विकास के एक नए स्वरूप के साथ देश के सामने उभरेगा।
बस्तर पंडुम 2026: संस्कृति और सम्मान का संगम
बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संयुक्त रूप से विजेता लोक कलाकारों को सम्मानित किया। अमित शाह ने मंच से घोषणा की कि प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कलाकारों को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल सम्मान नहीं, बल्कि बस्तर की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास है।
शाह ने कहा कि बस्तर के लोक कलाकारों में जो प्रतिभा, समर्पण और सांस्कृतिक चेतना है, वह पूरे देश के लिए गर्व की बात है। ऐसे आयोजनों से कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ता है और युवा पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ती है।
क्यों किया बस्तर पंडुम का आयोजन?
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम का उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं और लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाना है। उन्होंने इस आयोजन में भाग लेने वाले सभी कलाकारों और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए बताया कि पिछले वर्ष जहां करीब 47 हजार कलाकारों ने हिस्सा लिया था, वहीं इस बार 54 हजार से अधिक कलाकारों की भागीदारी दर्ज की गई।
इस दौरान बस्तर की संस्कृति, खान-पान, पारंपरिक वेशभूषा, लोकसाहित्य, लोकनृत्य, गीत, हस्तशिल्प, पारंपरिक पेय, औषधीय ज्ञान, चित्रकला, वाद्ययंत्र और नाट्य कला सहित कुल 12 विधाओं का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का माध्यम बना है, बल्कि इसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक प्रभावी मंच भी साबित हुआ है।
बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में
विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर अब तेजी से बदल रहा है और संभावनाओं की नई भूमि के रूप में उभर रहा है। उन्होंने इसे “नए भारत का नया बस्तर” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से क्षेत्र के विकास की चर्चा पूरे देश में हो रही है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि एक समय था जब बस्तर का नाम माओवादी गतिविधियों के कारण लिया जाता था, लेकिन अब यहां की संस्कृति, पर्यटन और विरासत चर्चा का विषय बन रही है।
नई सुबह देखने को मिल रही है
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौतियों से जूझता रहा, जिससे यहां की सांस्कृतिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई थीं। गौर, माड़िया, मुरिया, भतरा, धुरवा और गोंड जैसे समुदायों के पारंपरिक नृत्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई थी और मांदर की थाप भी मानो शांत हो गई थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और क्षेत्र में विकास की नई सुबह दिखाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान चला रही हैं। लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक इस समस्या को जड़ से खत्म किया जाए।
आत्मसमर्पण नीति के तहत सम्मान के साथ पुनर्वास
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जवान कठिन परिस्थितियों में भी साहस के साथ नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। साथ ही “नियद नेल्ला नार” (आपका अच्छा गांव) योजना के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि आत्मसमर्पण नीति को अधिक मानवीय बनाया गया है। जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है, ताकि वे समाज के साथ नई शुरुआत कर सकें।

