द लोकतंत्र/ लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर निशाना साधा है। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री को लेकर दिए गए बयान से वे सहमत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति स्वयं को योगी कहता है, क्या वह शंकराचार्य जैसे धार्मिक पद पर आसीन संत के बारे में इस तरह की भाषा का प्रयोग कर सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी का कर्तव्य है और उनके विचारों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर शंकराचार्य से ‘100 प्रतिशत सहमत’ हैं। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।
सपा में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बदले राजनीतिक समीकरण
वहीं, रविवार (15 फरवरी) को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता Naseemuddin Siddiqui समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। अखिलेश यादव ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर सिद्दीकी की पत्नी और सात अन्य नेताओं ने भी सपा का दामन थामा।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी पहले बहुजन समाज पार्टी में लंबे समय तक सक्रिय रहे और मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। बाद में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की थी, लेकिन पिछले महीने उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को इस्तीफा भेजकर पार्टी छोड़ दी। अपने पत्र में उन्होंने व्यक्तिगत और ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला दिया था।
सपा में शामिल होने के बाद सिद्दीकी ने कहा कि विभिन्न दलों में रहते हुए भी वे हमेशा Mulayam Singh Yadav से प्रभावित रहे और अखिलेश यादव को अपना नेता मानते रहे हैं। उनके इस कदम को उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब राज्य में आगामी चुनावी समीकरण बन रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में शामिल होना पार्टी के सामाजिक आधार को मजबूत कर सकता है। वहीं, शंकराचार्य विवाद पर अखिलेश यादव की टिप्पणी से राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की सियासत में और गर्मा सकता है।

