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India AI Impact Summit 2026: विनोद खोसला बोले- AI का लाभ भारत की निचली 50% आबादी तक पहुँचना जरूरी

India AI Impact Summit 2026: Vinod Khosla said – it is important to make the benefits of AI reach the bottom 50% of India's population.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में टेक उद्यमी और Vinod Khosla ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असली असर तभी दिखेगा, जब इसका सीधा लाभ भारत की निचली 50 प्रतिशत आबादी तक पहुंचे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि को तीन ऐसे क्षेत्र बताया, जहां अगले एक-दो वर्षों में बड़े पैमाने पर AI आधारित समाधान लागू कर करीब 1.5 अरब लोगों को तत्काल और ठोस लाभ दिया जा सकता है।

खोसला ने कहा कि यदि AI केवल शहरी या संपन्न वर्ग तक सीमित रह गया, तो इसका सामाजिक प्रभाव सीमित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक AI देश के सबसे वंचित वर्ग को सशक्त नहीं करेगा, तब तक हम वास्तविक परिवर्तन नहीं देख पाएंगे।

उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में AI आधारित पर्सनल ट्यूटर की वकालत की। उनके अनुसार, ग्रामीण भारत में लाखों बच्चे पर्याप्त शैक्षणिक सहयोग से वंचित हैं और कई जगह शिक्षक नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होते। AI ट्यूटर सीखने की कमियों की पहचान कर व्यक्तिगत स्तर पर मार्गदर्शन दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी द्वारा संचालित गैर-लाभकारी संस्था CK-12 Foundation के माध्यम से AI आधारित शिक्षण मॉडल विकसित किया गया है और भारत में लगभग 40 लाख छात्र इससे लाभान्वित हो चुके हैं। ये टूल्स सीबीएसई पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप हैं।

24×7 AI डॉक्टर और किसानों के लिए वॉयस-फर्स्ट AI असिस्टेंट का प्रस्ताव

स्वास्थ्य क्षेत्र में खोसला ने 24 घंटे उपलब्ध AI डॉक्टर की परिकल्पना रखी, जो प्राथमिक उपचार, क्रॉनिक बीमारियों की निगरानी, मानसिक और शारीरिक थेरेपी तथा पोषण परामर्श जैसी सेवाएं कम या बिना लागत के उपलब्ध करा सके। उन्होंने कहा कि गंभीर और आपात स्थितियों में मामलों को मानव चिकित्सकों के पास भेजा जाएगा, लेकिन शुरुआती स्तर पर AI सिस्टम बड़ी भूमिका निभा सकता है।

खोसला ने यह भी सुझाव दिया कि AI आधारित सेवाओं को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाए। उन्होंने आधार और यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि सेवाओं के एकीकरण की बात कही। इसके लिए उन्होंने एक सेक्शन 8 गैर-लाभकारी कंपनी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जो इन सेवाओं को विकसित कर अंततः आधार इकोसिस्टम में ट्रांसफर कर दे।

कृषि के क्षेत्र में उन्होंने कम साक्षरता और बहुभाषी उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए वॉयस-फर्स्ट AI असिस्टेंट का सुझाव दिया। यह टूल फोटो के आधार पर फसल और कीटों की पहचान, मौसम आधारित सलाह (IMD और ICAR-GKMS डेटा के जरिए), फसल कैलेंडर, सिंचाई और पोषक तत्वों की सिफारिश, इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों तक एस्केलेशन जैसी सुविधाएं दे सकता है। खोसला ने कहा कि तकनीक आज इतनी सक्षम है कि इन सेवाओं को बेहद कम लागत पर लागू किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत ने समय रहते AI को वंचित वर्ग के लिए उपयोग में नहीं लाया, तो यह एक ऐतिहासिक अवसर चूकने जैसा होगा।

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