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रमजान 2026: छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पहले घर जाने की अनुमति

Ramzan 2026: Chhattisgarh government takes a big decision, Muslim employees allowed to go home an hour earlier

द लोकतंत्र/ रायपुर : इस्लाम के पवित्र महीने रमजान की शुरुआत के साथ ही देशभर में इबादत और रोज़े का सिलसिला शुरू हो गया है। रमजान को रहमत और हिदायत का महीना माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान पवित्र कुरआन का अवतरण हुआ था। इस पूरे महीने मुसलमान रोज़ा रखते हैं और इफ्तार व तरावीह जैसी विशेष इबादतों में शामिल होते हैं। इसी पवित्र अवसर को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आदेश जारी कर सरकारी दफ्तरों में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के दौरान कार्यावधि से एक घंटा पहले घर जाने की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य यह है कि रोज़ेदार कर्मचारी समय पर नमाज़ अदा कर सकें और इफ्तार की तैयारी कर सकें। सरकार के इस फैसले का छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी धर्मों और समुदायों की आस्था का सम्मान कर रही है। उनके मुताबिक, यह निर्णय सामाजिक सद्भाव और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी विशेष छूट, राज्यों में दिखी संवेदनशीलता

छत्तीसगढ़ से पहले तेलंगाना सरकार ने भी रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष राहत देने का निर्णय लिया था। राज्य के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी मुस्लिम सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, अनुबंध व आउटसोर्सिंग स्टाफ और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी शाम 4 बजे कार्यालय या स्कूल से निकल सकेंगे, जो सामान्य समय से एक घंटा पहले है।

इसी तरह आंध्र प्रदेश सरकार ने भी 18 फरवरी से 19 मार्च 2026 तक रमजान की अवधि में मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पहले छुट्टी देने का आदेश जारी किया है। यह छूट सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और अनुबंध आधारित कर्मचारियों पर लागू होगी, ताकि वे नमाज़ और इफ्तार में शामिल हो सकें।

इन फैसलों को कई लोग प्रशासनिक संवेदनशीलता और धार्मिक विविधता के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। रमजान के दौरान रोज़ेदारों के लिए दिनभर उपवास के बाद शाम का समय विशेष महत्व रखता है। ऐसे में एक घंटा पहले छुट्टी का निर्णय उन्हें धार्मिक कर्तव्यों के निर्वहन में सहूलियत देता है। कुल मिलाकर, विभिन्न राज्यों द्वारा उठाए गए ये कदम दिखाते हैं कि प्रशासन धार्मिक अवसरों के प्रति लचीला रुख अपना रहा है। इससे सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा मिलता है और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान की भावना मजबूत होती है।

यह भी पढ़ें : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बीजेपी 1 मार्च से शुरू करेगी ‘परिवर्तन यात्राएं’, मोदी करेंगे मेगा रैली को संबोधित

Team The Loktantra

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