द लोकतंत्र/ पटना : बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एमएलसी सुनील सिंह ने बुधवार (25 फरवरी, 2026) को बड़ा दावा करते हुए कहा कि राज्य में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां पैसे देने पर शराब की डिलीवरी न हो सके। उन्होंने कहा कि अगर सरकार या कोई और पक्ष इसे साबित करना चाहता है तो 27 फरवरी को विधानसभा के अंतिम दिन वे स्वयं वहां शराब की डिलीवरी करवा सकते हैं।
सुनील सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्ष 2016 में जब बिहार में शराबबंदी लागू हुई थी, उससे पहले जितनी शराब की खपत होती थी, अब उससे कई गुना अधिक हो रही है। उनके अनुसार, राज्य की भौगोलिक स्थिति भी इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में चुनौती है। बिहार की सीमाएं उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और नेपाल से लगती हैं, जहां शराबबंदी लागू नहीं है। ऐसे में राज्य में शराब की तस्करी को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है।
‘सूखे नशे’ का बढ़ता खतरा और नीति पर सवाल
आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि शराबबंदी के बावजूद अवैध आपूर्ति जारी है और इसके कारण युवा पीढ़ी ‘सूखे नशे’ की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को शराब नहीं मिलती, वे अन्य प्रकार के नशे का सहारा ले रहे हैं, जिससे सामाजिक समस्याएं और बढ़ रही हैं।
बिना सीधे नाम लिए उन्होंने राज्य सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कानून बना देने से सामाजिक कुरीतियां खत्म नहीं होतीं। उन्होंने दहेज प्रथा का उदाहरण देते हुए कहा कि कानून होने के बावजूद कई जगहों पर इसका पालन नहीं होता। उसी तरह शराबबंदी भी कागजों तक सीमित रह गई है। सुनील सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि राजधानी पटना में कई संवेदनशील और प्रमुख इलाकों के आसपास भी अवैध डिलीवरी पॉइंट सक्रिय हैं। हालांकि, उन्होंने विस्तार से जानकारी देने से इनकार किया और कहा कि वे ‘परत दर परत’ खुलासा नहीं करना चाहते।
बिहार में शराबबंदी 2016 से लागू है और इसे राज्य सरकार की प्रमुख नीतियों में से एक माना जाता है। समय-समय पर विपक्ष इस कानून के प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाता रहा है। सुनील सिंह के ताजा बयान के बाद राज्य की राजनीति में फिर से इस मुद्दे पर बहस तेज होने की संभावना है।

