द लोकतंत्र/ रायपुर : रायपुर में आंबेडकर जयंती के अवसर पर एक ऐसा आयोजन देखने को मिला, जिसने केवल एक कार्यक्रम की सीमा को पार करते हुए समाज में समानता और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया। राजधानी के शंकरनगर स्थित दुर्गा मैदान में आयोजित ‘समरसता भोज’ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आम लोगों के बीच पहुंचे, उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया और अपने हाथों से खाना परोसा। यह आयोजन भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया गया था, जिसका उद्देश्य सामाजिक समरसता को मजबूत करना था।
संविधान और समानता पर मुख्यमंत्री का जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के अधिकार और सम्मान की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी मजबूती का सबसे बड़ा कारण संविधान है, जिसे बाबा साहेब आंबेडकर ने गढ़ा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से संविधान के मूल्यों को अपनाने और उसे जीवन में उतारने की अपील की।
समरसता भोज से सामाजिक एकता का संदेश
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने वीआईपी संस्कृति से अलग हटकर आम नागरिकों के साथ बैठकर भोजन किया। उन्होंने स्वयं लोगों को खाना परोसते हुए यह संदेश दिया कि समाज में सभी समान हैं और भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह दृश्य लोगों के बीच खासा चर्चा का विषय बना और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बाबा साहेब आंबेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
बाबा साहेब ने महिलाओं के अधिकार और शिक्षा को बढ़ावा दिया – CM साय
नारी शिक्षा के विषय पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बाबा साहेब ने महिलाओं के अधिकार और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक सुधार की इस धारा को आगे बढ़ाने में आंबेडकर की बड़ी भूमिका रही। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों को ‘पंच तीर्थ’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों और योगदान को समझ सकें।
कार्यक्रम में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक किरण सिंह देव और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हुए। सभी ने बाबा साहेब के विचारों को समाज में लागू करने और समानता व न्याय को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। आज के समय में, जब समाज कई बार विभाजन की ओर बढ़ता दिखता है, ऐसे आयोजन एकता और समरसता का संदेश देने में अहम भूमिका निभाते हैं। ‘समरसता भोज’ न केवल एक प्रतीकात्मक पहल है, बल्कि यह समाज को यह याद दिलाता है कि संविधान में निहित समानता के सिद्धांतों को व्यवहार में लाना कितना जरूरी है।

