द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित राजनीतिक उठापटक की चर्चाओं के बीच आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, ताकि उन्हें दल बदलने के लिए मजबूर किया जा सके।
संजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को अपने सिद्धांतों और जनादेश के प्रति ईमानदार रहना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि कोई नेता जांच एजेंसियों के दबाव में आकर पार्टी छोड़ता है, तो वह अपने मतदाताओं के विश्वास के साथ भी समझौता करता है।
उन्होंने कहा कि इतिहास बहादुर लोगों को याद रखता है, जबकि दबाव के आगे झुकने वालों को जनता कभी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखती। उनके बयान को महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
बीजेपी दो-तिहाई बहुमत के लिए विपक्ष को कमजोर कर रही – Sanjay Singh
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के उद्देश्य से विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न राजनीतिक दलों में टूट और नेताओं के दल बदलने के पीछे इसी प्रकार की राजनीतिक कोशिशें हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास न तो कोई जांच एजेंसी है और न ही ऐसा कोई तंत्र, जिससे वह इस तरह के दबाव का जवाब दे सके। उनके अनुसार विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखना है। आप सांसद ने कहा कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधि दबाव के कारण अपनी राजनीतिक निष्ठा बदलते हैं, तो इसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।
Sanjay Singh ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी जताई चिंता
संजय सिंह ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव को लेकर भी अपनी आशंकाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो देश की क्षेत्रीय पार्टियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने बताया कि वह इस विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सदस्य हैं और उनकी राय में यह प्रस्ताव क्षेत्रीय दलों के राजनीतिक प्रभाव को सीमित कर सकता है।
इसके अलावा उन्होंने राजनीतिक दलों के बदलते समीकरणों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में अक्सर नेताओं के प्रति दृष्टिकोण परिस्थितियों के अनुसार बदल जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं की पहले आलोचना की जाती थी, वे यदि राजनीतिक रूप से साथ आ जाएं तो उनके प्रति रवैया भी बदल जाता है।
संजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह बयान राजनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना रह सकता है।



