द लोकतंत्र/नई दिल्ली : Israel-Iran Conflict 2026 मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शनिवार (28 फरवरी 2026) सुबह Israel ने ईरान की राजधानी Tehran सहित कई शहरों पर सैन्य हमला किया। इसके जवाब में Iran ने न केवल इजरायल, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कतर के अल उदेइद एयर बेस, कुवैत के अल सालेम बेस, यूएई के अल धाफरा एयर बेस और बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवीं फ्लीट के बेस की दिशा में मिसाइलें दागीं। इसके अलावा सऊदी अरब की राजधानी रियाद और इजरायल के हाइफा व गैली क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। इस बीच, ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की एक सांकेतिक तस्वीर जारी की, जिसे कई विश्लेषक मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
नेतन्याहू का बयान: ‘आतंकवादी शासन के खिलाफ अभियान’
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के ‘आतंकवादी शासन’ के खिलाफ अभियान शुरू किया है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले कई दशकों से ईरानी शासन इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारे लगाता रहा है और क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देता आया है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान मानवता की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है।
ईरान की चेतावनी और संयुक्त राष्ट्र से अपील
हमलों के बाद ईरान ने संयुक्त राष्ट्र का रुख किया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका और इजरायल का हमला उसकी क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई उस समय की गई, जब कूटनीतिक प्रक्रिया जारी थी।
तेहरान ने चेतावनी दी है कि वह हमलावरों को ‘निर्णायक और ठोस जवाब’ देगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश ने कभी भी बाहरी दबाव के आगे झुकाव नहीं दिखाया है और इस बार भी वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करेगा। मध्य पूर्व में बढ़ता यह सैन्य टकराव वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर गहरा असर डाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम कर पाएंगे या क्षेत्र एक व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ रहा है।

