द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दिल्ली आबकारी नीति मामले में राहत मिलने के बाद Arvind Kejriwal की अगुवाई वाली Aam Aadmi Party (AAP) ने 1 मार्च को जंतर-मंतर पर रैली आयोजित करने का ऐलान किया था। हालांकि, ऐन मौके पर Delhi Police ने अनुमति नहीं दी, जिसके बाद कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। इस फैसले पर आम आदमी पार्टी ने कड़ी नाराजगी जताई है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि रैली की घोषणा कई दिन पहले कर दी गई थी, लेकिन अंतिम समय में पुलिस द्वारा अनुमति वापस ले ली गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह कदम अदालत के हालिया आदेश के बाद उठाया गया है। केजरीवाल ने इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण रैली और अपनी बात रखना लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे रोका नहीं जाना चाहिए।
‘क्या यह तानाशाही नहीं?’ – केजरीवाल
अपने बयान में केजरीवाल ने बिना सीधे नाम लिए केंद्र और दिल्ली में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रैली करने की अनुमति न देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका कहना है कि जंतर-मंतर लंबे समय से आंदोलनों और सभाओं का निर्धारित स्थल रहा है, ऐसे में अनुमति न देना राजनीतिक हस्तक्षेप का संकेत देता है। AAP नेताओं का आरोप है कि रैली का उद्देश्य अदालत के फैसले के बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करना था। पार्टी इसे “जनसमर्थन दिखाने का शांतिपूर्ण प्रयास” बता रही है।
संजय सिंह का दावा: ‘कमिश्नर फोन नहीं उठाते’
इस मुद्दे पर Sanjay Singh ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर सभा की अनुमति देना दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्हें इजाजत नहीं दी गई। संजय सिंह का दावा है कि उन्होंने कई बार पुलिस आयुक्त से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन का जवाब नहीं मिला।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद राजधानी की सियासत में नया मोड़ ला सकता है, खासकर तब जब अदालत के फैसले के बाद AAP खुद को राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में मान रही है। रैली रद्द होने से समर्थकों में निराशा है, वहीं पार्टी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के रूप में पेश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

