द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर केंद्र पर निशाना साधा है। रविवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक शोकसभा के दौरान अय्यर ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हिंसा पर भारत को स्पष्ट रूप से चिंता व्यक्त करनी चाहिए थी।
अय्यर ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया इस क्षेत्र में जारी संघर्ष के समाप्त होने की उम्मीद कर रही है। उनके अनुसार, ग्लोबल साउथ के कई देश भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं, लेकिन भारत की ओर से इस मुद्दे पर मजबूत प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया से ऐसा लगता है कि भारत अमेरिका और इज़राइल के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है, जबकि इस स्थिति में संतुलित और शांतिपूर्ण रुख अपनाना जरूरी था।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े देश को शांति और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आवाज उठानी चाहिए।
ईरान-इज़राइल तनाव के बीच भारत ने जताई चिंता, संयम बरतने की अपील
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और भी बढ़ गया है। पिछले सप्ताह अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य हमलों में खामेनेई सहित कई प्रमुख नेताओं की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइली ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए।
इस बढ़ते संघर्ष के बीच भारत ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास में जाकर शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और भारत सरकार की ओर से संवेदना व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली से मुलाकात कर भारत की सहानुभूति का संदेश दिया।
ईरानी दूतावास ने खामेनेई की मौत के बाद शोक-पुस्तिका खोली थी, ताकि राजनयिक, अधिकारी और आम लोग अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। भारत ने इस दौरान पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में क्षेत्रीय संघर्ष के और बढ़ने की आशंका है, जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगातार शांति और कूटनीतिक समाधान की अपील की जा रही है।

