द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली में द सोलटॉक साहित्यिक संस्थान द्वारा आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम ‘स्त्री रंग – रचनाओं का उत्सव’ ने साहित्य प्रेमियों को एक यादगार और प्रेरणादायक शाम प्रदान की। 8 मार्च को आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवि और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से स्त्री जीवन, संवेदनाओं और संघर्ष के विविध आयामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के अध्यक्ष आशीष द्विवेदी के संबोधन से हुई। उन्होंने अपने वक्तव्य में साहित्य के महत्व और समाज में स्त्री की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके बाद कार्यक्रम का पहला सत्र आरंभ हुआ, जिसका संचालन नीलमणि झा और आरम्भ ने किया। इस सत्र में मंच पर आए कवियों ने अपनी प्रभावशाली कविताओं से वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा और संवेदनाओं से भर दिया।
कविता पाठ के दौरान श्रोताओं ने हर प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया और सभागार तालियों की गूंज से बार-बार गूंजता रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति को मंच देना ही नहीं था, बल्कि स्त्री जीवन के अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों को शब्दों के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत करना भी था।
देशभर के रचनाकारों ने कविताओं से बांधा समां
कार्यक्रम के दूसरे चरण का संचालन हिना आलम ने किया। उन्होंने अपने सशक्त और जीवंत अंदाज से पूरे कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम के शीर्षक “स्त्री रंग” पर आधारित अपनी कविता भी प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके बाद दूसरे सत्र में कई रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से स्त्री सशक्तिकरण, समाज में महिलाओं की भूमिका और उनकी संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र का संचालन सचिन परवाना ने किया। इस सत्र में भी कवियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। इस साहित्यिक आयोजन में मंच पर अपनी प्रस्तुति देने वाले प्रमुख रचनाकारों में मोहिनी राय, मोना सुंदरम, रक्षा सिन्हा, हिमांशु शुक्ला, प्रेरणा सिंह, कुलदीप कौर, इप्सित पांडेय, मोनिका सिंह ‘मोह’, मीना सिंह “मीन”, भूमि श्रीवास्तव, शुभ्रा पालीवाल, इशिता भाटी, स्मिता सिंह चौहान, श्रीया, शायर कैफ़ी, मधुमयी, चारू मेहता, गगन ढींगरा, अंजलि करण सरधना, अवधेश कनौजिया और गणेश गौतम शामिल रहे।
कार्यक्रम में सुषमा गुप्ता, अमृतेश, वंदना यादव और डॉ. कीर्ति काले बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहीं। सभी अतिथियों ने अपने संबोधन में साहित्य, सृजन और सामाजिक संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित किया और उपस्थित रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया।
अंत में संस्था के मुख्य सचिव नीलमणि झा ने सभी अतिथियों, रचनाकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया। महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम स्त्री सृजन, साहित्यिक संवेदना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।

