द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर टिप्पणी की थी। प्रियंका गांधी ने कहा कि सदन में राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला करना उचित नहीं था, क्योंकि चर्चा का विषय स्पीकर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव था।
मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने सदन में एक असंसदीय शब्द का इस्तेमाल किया, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि बहस का मुद्दा लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव था, लेकिन चर्चा को राहुल गांधी की ओर मोड़ दिया गया।
दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह ने दो दिन तक चली बहस का जवाब देते हुए राहुल गांधी की संसद में उपस्थिति को लेकर आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति लगभग 51 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 66 प्रतिशत था। इसी तरह 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत और 15वीं लोकसभा में 43 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। अमित शाह के इन बयानों के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन में जोरदार विरोध जताया और नारेबाजी की।
स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर संसद में तीखी बहस
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्ताव पर दो दिनों तक चर्चा चली, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने जवाब में कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना संसदीय परंपराओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लगभग चार दशक बाद पहली बार लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है, जो संसदीय राजनीति के लिए चिंताजनक संकेत है।
शाह ने कहा कि संसद की कार्यवाही आपसी विश्वास के आधार पर चलती है और स्पीकर को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का निष्पक्ष संरक्षक माना जाता है। उन्होंने कहा कि संविधान ने स्पीकर को एक मध्यस्थ की भूमिका दी है, इसलिए इस पद की गरिमा पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी लंबे समय तक विपक्ष में रही है, लेकिन उसने कभी भी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया।
बहस के बाद जब सदन में शोर-शराबा जारी था, तब पीठासीन अधिकारी के रूप में मौजूद बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने ध्वनि मत के जरिए मतदान कराया। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच प्रस्ताव को खारिज घोषित कर दिया गया। इस दौरान करीब 42 सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया और सदन का माहौल काफी गरम रहा।

