द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-ईरान के बीच 15 दिनों के लिए सीजफायर का ऐलान किया गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल के बाद अब थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है। इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को सीमित अवधि के लिए खोल दिया गया है, जिससे तेल और गैस से भरे जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकेगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस जलमार्ग के बंद होने से दुनियाभर में ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही थी और भारत पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तय डेडलाइन से पहले ही दोनों देशों ने हमले रोकने पर सहमति जताई, जिसके बाद यह अहम कदम उठाया गया।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है। भारत के लिए यह मार्ग और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत लगभग 40% कच्चा तेल, 50% से अधिक एलएनजी और करीब 90% एलपीजी इसी रास्ते से प्राप्त करता है।
जब यह मार्ग बंद हुआ था, तब भारत में ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा था और सप्लाई चेन बाधित हो गई थी। कई टैंकर समुद्र में फंसे रह गए, जिससे एलपीजी और अन्य ईंधनों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
क्या तुरंत खत्म होगी एलपीजी और ईंधन की किल्लत?
हालांकि होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा। जहाजों की आवाजाही सामान्य होने, फंसे हुए टैंकरों के निकलने और सप्लाई चेन के दोबारा पटरी पर आने में समय लगेगा। फिलहाल फारस की खाड़ी में भारत के कई जहाज अब भी फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकलने में कुछ दिन लग सकते हैं। हालांकि कुछ टैंकरों ने अपनी यात्रा फिर से शुरू कर दी है, जिससे धीरे-धीरे स्थिति में सुधार होने की संभावना है।
इस 15 दिन के सीजफायर के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की भी तैयारी चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच वार्ता प्रस्तावित है, जहां स्थायी समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से भारत और दुनिया को राहत मिलने की शुरुआत जरूर हुई है, लेकिन पूरी तरह से सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी कुछ समय लग सकता है।

