The Loktantra / National Desk : इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज Yashwant Varma ने 10 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे उन्होंने राष्ट्रपति Droupadi Murmu को सौंपा है। यह इस्तीफा एक हाई-प्रोफाइल कैश विवाद और उनके खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया के बीच आया है। उनके इस कदम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस्तीफे के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, यहां तक कि गिरफ्तारी भी संभव है।
इस्तीफे के बाद खत्म होगी संवैधानिक सुरक्षा
जज के पद पर रहते हुए Yashwant Varma को कुछ संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त थी, जो उन्हें सीधे आपराधिक कार्रवाई से बचाती थी। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार इस्तीफा स्वीकार हो जाने के बाद ये सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाती है। इसके बाद उन्हें एक आम नागरिक की तरह माना जाएगा और जांच एजेंसियां सामान्य आपराधिक कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं।
इसका सीधा अर्थ है कि अब यदि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो पुलिस या अन्य जांच एजेंसियां न सिर्फ एफआईआर दर्ज कर सकती हैं, बल्कि आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी कर सकती हैं।
महाभियोग प्रक्रिया और FIR का कानूनी पहलू
इस्तीफे के साथ ही उनके खिलाफ शुरू की गई महाभियोग प्रक्रिया तकनीकी रूप से समाप्त हो जाएगी। दरअसल, महाभियोग का उद्देश्य किसी मौजूदा जज को पद से हटाना होता है। ऐसे में पद छोड़ देने के बाद यह प्रक्रिया अप्रासंगिक हो जाती है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि उन पर लगे आरोप खत्म हो गए हैं।
कानून के अनुसार, यदि जांच एजेंसियों को प्राथमिक जांच में भ्रष्टाचार या अवैध संपत्ति के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि Veeraswami Judgment के तहत किसी कार्यरत हाई कोर्ट जज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश से अनुमति आवश्यक होती है। लेकिन इस्तीफे के बाद यह प्रावधान उसी रूप में लागू नहीं रहता।
कैश विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा मामला मार्च 2025 की एक घटना से जुड़ा है, जब दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने के बाद कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी और जले हुए नोट बरामद हुए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति ने प्रारंभिक स्तर पर उन्हें दोषी पाया था। इसके बाद 146 सांसदों द्वारा उनके खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू की गई थी।
Yashwant Varma के इस्तीफे के बाद अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। यदि जांच एजेंसियों को पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो एफआईआर से लेकर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई संभव है। आने वाले दिनों में इस मामले में जांच की दिशा और तेज हो सकती है।

