द लोकतंत्र/ रायपुर : बस्तर संभाग में बच्चों और माताओं के बेहतर भविष्य को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में अब नक्सल प्रभावित इलाकों में आंगनबाड़ी सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार ने बस्तर संभाग के 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नए भवन निर्माण प्रक्रिया को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, राज्य सरकार चाहती है कि नक्सल मुक्त घोषित क्षेत्रों में कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र बिना भवन के न रहे। यही वजह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन को समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक सभी भवनविहीन केंद्रों को पक्के भवन उपलब्ध कराना है।
बस्तर आंगनबाड़ी निर्माण पर Vishnu Deo Sai सरकार का बड़ा फोकस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ पोषण वितरण तक सीमित नहीं हैं। ये बच्चों के शुरुआती विकास और मातृ स्वास्थ्य की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी और दूरस्थ इलाकों में बेहतर आंगनबाड़ी व्यवस्था बेहद जरूरी है।
इसके अलावा सरकार चाहती है कि बच्चों को सुरक्षित और प्रेरक वातावरण मिले। वहीं गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
किन जिलों में बनेंगे नए आंगनबाड़ी भवन?
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बस्तर संभाग के कई जिलों में भवनविहीन केंद्रों की पहचान की है। इनमें बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिले शामिल हैं। हालांकि, यह सिर्फ निर्माण परियोजना नहीं मानी जा रही। सरकार इसे सामाजिक बदलाव से जोड़कर देख रही है। मुख्य सचिव स्तर की समीक्षा बैठक में भी इसे शासन की प्राथमिकता बताया गया था।
वहीं सभी जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि मांग आधारित प्रक्रिया के तहत प्राथमिकता से स्वीकृतियां दी जाएं।
BaLA कॉन्सेप्ट से तैयार होंगे आधुनिक केंद्र
सरकार इस बार आंगनबाड़ी भवनों को सिर्फ साधारण ढांचा नहीं बनाना चाहती। मुख्यमंत्री ने “BaLA यानी Building as Learning Aid” कॉन्सेप्ट अपनाने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, इस मॉडल में भवन खुद बच्चों के सीखने का माध्यम बनता है। दीवारों, रंगों और डिजाइनों के जरिए बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाती है। इससे पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का माहौल मजबूत होता है।
इसके अलावा बच्चों के मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को भी बढ़ावा मिलता है। सरकार का मानना है कि शुरुआती शिक्षा का वातावरण बेहतर होने से बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत होता है।
एक भवन पर खर्च होंगे 11.69 लाख रुपये
सरकार ने प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन के लिए 11 लाख 69 हजार रुपये तय किए हैं। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग दो लाख रुपये देगा। वहीं महात्मा गांधी नरेगा योजना से आठ लाख रुपये उपलब्ध होंगे। इसके अलावा बाकी राशि डीएमएफ, सीएसआर और अन्य स्थानीय संसाधनों से जुटाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं के अभिसरण से विकास कार्यों को तेजी मिल रही है।
नक्सल क्षेत्रों में विकास को मिलेगी मजबूती – Vishnu Deo Sai
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सड़क, बिजली और पानी के साथ अब सामाजिक ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मजबूत आंगनबाड़ी व्यवस्था गांवों में सकारात्मक बदलाव लाएगी। वहीं बच्चों और महिलाओं का भविष्य सुरक्षित होगा। सरकार का मानना है कि विकास और विश्वास दोनों साथ चलेंगे तभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी बदलाव आएगा।

