द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : पंजाब की राजनीति में एक बार फिर तीखा विवाद सामने आया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के सभी विधायकों का एल्कोहल मीटर से डोप टेस्ट कराने की मांग की है। इस बयान के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है और अब आम आदमी पार्टी ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
AAP का जवाब: बेहूदा आरोप, सदन की गरिमा को ठेस
पंजाब AAP के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि यह बयान न केवल निराधार है बल्कि विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में बुलाया गया विशेष सत्र मजदूरों के सम्मान और उनके योगदान को सराहने के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन कांग्रेस इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज कर गैर-जरूरी और भ्रामक टिप्पणियां कर रही है। अरोड़ा ने इसे “मजदूरों के जख्मों पर नमक छिड़कने” जैसा बताया और कहा कि विपक्ष का यह रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
फ्लोर टेस्ट के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और हाल ही में विधायकों को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, उस पर स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी। AAP का मानना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रहा है।
कांग्रेस और बीजेपी का रुख: जांच की मांग पर अड़े
दूसरी ओर, प्रताप सिंह बाजवा ने अपने आरोपों को सही ठहराते हुए कहा कि AAP के पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा ने भी मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वे शराब के नशे में विधानसभा में मौजूद थे। बाजवा का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह सदन के नियमों और विशेषाधिकारों का उल्लंघन है, इसलिए इस मामले में स्पीकर को संज्ञान लेते हुए डोप टेस्ट का आदेश देना चाहिए।
इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी कांग्रेस के रुख का समर्थन किया है। पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि विशेष सत्र का महत्व अधिक होता है और ऐसे में अगर विधायकों का ब्रेथलाइजर टेस्ट किया जाए तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, इस पूरे विवाद पर अब तक मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। डोप टेस्ट की मांग को लेकर पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जो आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।

