द लोकतंत्र/ कोलकाता : West Bengal Election 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी ने हार के बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने से इंकार करते हुए आरोप लगाया कि उनकी हार के पीछे नरेंद्र मोदी, अमित शाह और Election Commission of India की भूमिका रही है। ममता बनर्जी का कहना है कि यह जनादेश नहीं, बल्कि ‘साजिश’ है और वे इस परिणाम को वैध नहीं मानतीं।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और लगभग 100 सीटों पर ‘जनादेश की लूट’ की गई। उन्होंने यह भी कहा कि काउंटिंग को जानबूझकर धीमा किया गया, जिससे परिणाम प्रभावित हुए। उनके अनुसार, यह चुनाव निष्पक्ष नहीं था और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) वास्तव में हारी नहीं है। इसी वजह से उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी और संवैधानिक विकल्पों पर विचार करेंगी।
BJP का पलटवार: ‘लोकतंत्र का सम्मान जरूरी’
ममता बनर्जी के इस रुख पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे “चिंताजनक और हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि भारत विश्व में लोकतंत्र की मजबूत पहचान रखता है और इस तरह के बयान संविधान की भावना के खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत स्वाभाविक है और नेताओं को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। पात्रा ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई नेताओं ने हार के बाद शांतिपूर्ण तरीके से पद छोड़ा है, लेकिन ममता बनर्जी का रुख ‘एंटाइटलमेंट’ और अहंकार को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति लोकतंत्र में अपरिहार्य नहीं होता और सत्ता का हस्तांतरण संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख, ‘इंडिया’ गठबंधन पर फोकस
रणनीतिक तौर पर ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दे रही हैं। उन्होंने विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने की बात कही और दावा किया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है।
इसके साथ ही उन्होंने आंदोलनकारी रुख अपनाने का ऐलान करते हुए कहा कि वे अब सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगी। उन्होंने चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा भी की और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की बात कही।
गौरतलब है कि इस चुनाव में BJP ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जिससे 15 साल पुराना TMC शासन समाप्त हो गया। इसके बावजूद ममता बनर्जी का यह रुख राज्य की राजनीति को और अधिक गर्मा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद संवैधानिक और राजनीतिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

