द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत संबंधी अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसे केवल दिखावे तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताओं द्वारा काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करना तभी सार्थक माना जाएगा, जब यह कदम लगातार और ईमानदारी से लागू किया जाए।
शरद पवार ने कहा कि एक-दो दिन के लिए ईंधन बचत का प्रदर्शन करने से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। अगर सरकार और नेता वास्तव में संसाधनों की बचत को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें इसे अपनी स्थायी कार्यशैली का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की अपील से साफ संकेत मिलता है कि देश के सामने परिस्थितियां गंभीर हैं और सभी राजनीतिक दलों को इस दिशा में जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
एनसीपी (SP) प्रमुख ने सुझाव दिया कि मौजूदा हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री को सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलानी चाहिए, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन बचत और प्रशासनिक खर्चों में कटौती को लेकर साझा रणनीति बनाई जा सके।
चुनाव के समय क्यों नहीं उठाया गया मुद्दा?
शरद पवार ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ईंधन बचत इतना महत्वपूर्ण मुद्दा था, तो चुनावों के दौरान इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने पूछा कि फ्यूल बचाने को लेकर फैसले लेने में इतनी देरी क्यों हुई।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की अपील यह दर्शाती है कि हालात सामान्य नहीं हैं। देश पहले भी इस तरह की परिस्थितियों का सामना कर चुका है। ऐसे समय में केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि ठोस और दीर्घकालिक फैसलों की जरूरत होती है।”
पवार ने यह भी कहा कि प्रशासनिक खर्चों को कम करने के कई विकल्प मौजूद हैं और सरकार को उन पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने नेताओं के बड़े काफिलों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रियों को 15 से 17 गाड़ियों के काफिले की जरूरत आखिर क्यों पड़ती है। अगर वास्तव में खर्चों में कटौती करनी है तो ऐसे काफिलों को स्थायी रूप से छोटा किया जाना चाहिए।
देवेंद्र फडणवीस के बाइक से मंत्रालय पहुंचने पर भी बोले पवार
देवेंद्र फडणवीस के बाइक से मंत्रालय पहुंचने के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री रोजाना ऐसा करते हैं, तभी लोग इसे गंभीर पहल मानेंगे। उन्होंने कहा कि केवल एक दिन बाइक से सफर करने से संदेश तो जाता है, लेकिन जनता स्थायी बदलाव देखना चाहती है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचत अपील के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने और प्रशासनिक खर्चों में कटौती जैसे कई फैसले लिए हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ से विधान भवन और मंत्रालय तक बाइक से पहुंचे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश में बढ़ती ईंधन लागत और वैश्विक परिस्थितियों के बीच अब राजनीतिक दलों पर भी सादगी और संसाधन संरक्षण को लेकर उदाहरण पेश करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

