द लोकतंत्र/ पटना : पश्चिम एशिया में जारी संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य सरकार का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर सरकार खुद पहल करेगी, तभी जनता भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित होगी। इसी सोच के तहत उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों के काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि ईंधन बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सप्ताह में एक दिन निजी वाहनों का उपयोग सीमित किया जाता है, तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
काफिलों में कटौती और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने सरकारी स्तर पर फिजूलखर्ची रोकने की शुरुआत खुद से की है। उन्होंने अपने और कैबिनेट मंत्रियों के काफिलों में शामिल वाहनों की संख्या न्यूनतम करने का फैसला लिया है। अब तक बड़े-बड़े काफिले वीवीआईपी संस्कृति का प्रतीक माने जाते थे, लेकिन नई पहल के तहत सुरक्षा और आवश्यकता के बीच संतुलन बनाते हुए सीमित वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
‘नो व्हीकल डे’ के दौरान लोगों से अपील की जाएगी कि वे निजी कार और बाइक का उपयोग कम करें और सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करें। सरकार मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों, ऑटो-रिक्शा और अन्य साझा परिवहन सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इससे प्रति व्यक्ति ईंधन खपत कम होगी और सड़क यातायात पर दबाव भी घटेगा।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस, पुलिस वाहन, दमकल विभाग और अन्य आपातकालीन सेवाओं को इस नियम से पूरी तरह छूट दी जाएगी। इसके अलावा जरूरी वस्तुओं की सप्लाई करने वाले मालवाहक वाहनों को भी राहत दी जाएगी ताकि बाजार व्यवस्था प्रभावित न हो।
वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल कार्य संस्कृति पर जोर
ईंधन बचाने की इस मुहिम को और प्रभावी बनाने के लिए बिहार सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों से वर्क फ्रॉम होम संस्कृति अपनाने की भी अपील की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुझाव दिया है कि सप्ताह में एक या दो दिन कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए।
सरकार का मानना है कि इससे दफ्तर आने-जाने में खर्च होने वाले ईंधन की बचत होगी और शहरों में ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन कार्यप्रणाली के इस दौर में यह पहल प्रशासनिक कार्यों को अधिक आधुनिक और सुविधाजनक बना सकती है। इसके साथ ही राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण मुक्त होने के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने में भी मददगार साबित हो सकते हैं।
राजनीतिक और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिहार सरकार की यह पहल सफल होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। आने वाले समय में ‘नो व्हीकल डे’ जैसे अभियान देशभर में ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

