द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर बड़ा हमला बोला है। उत्तर प्रदेश के Rae Bareli दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने दावा किया कि देश जल्द ही एक बड़े ‘आर्थिक तूफान’ का सामना कर सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में तैयार की गई आर्थिक व्यवस्था कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है। राहुल गांधी ने कहा कि आने वाले आर्थिक संकट का सबसे ज्यादा असर आम जनता, खासकर युवाओं, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा।
‘आर्थिक व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी’
रायबरेली में लोगों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा आर्थिक मॉडल लंबे समय तक टिकने वाला नहीं है। उन्होंने उद्योगपति Gautam Adani और Mukesh Ambani का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘जो आर्थिक झटका आने वाला है, उसका असर अडानी, अंबानी और मोदी जी पर नहीं पड़ेगा। इसका सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश के युवाओं, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर होगा।’
विदेश दौरों को लेकर पीएम मोदी पर तंज
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार आम लोगों को विदेश यात्रा कम करने और खर्च घटाने की सलाह दे रही है, जबकि प्रधानमंत्री लगातार विदेशी दौरों पर रहते हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार देश की आर्थिक चुनौतियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय जनता को सलाह देने में अधिक व्यस्त है।
खरगे ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने इसे ‘मोदी सरकार द्वारा पैदा किया गया आर्थिक संकट’ बताया। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतिगत विफलताओं का बोझ आम लोगों पर डाला जा रहा है, जबकि बड़े कॉरपोरेट घरानों को लगातार राहत दी जा रही है।
मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राजधानी Delhi में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों के साथ-साथ परिवहन, कृषि और छोटे कारोबारों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
तेल संकट और वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है, तो भारत का आयात बिल और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
ऐसे में विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहा है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

