द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच Karni Sena ने चुनावी मैदान में उतरने का बड़ा संकेत दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने घोषणा की है कि करणी सेना आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। शाहजहांपुर में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान उन्होंने यह ऐलान करते हुए कहा कि करणी सेना किसी भी राजनीतिक दल की “गुलाम” नहीं है और अब संगठन अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सूरजपाल सिंह अम्मू ने कहा कि करणी सेना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मान करती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संगठन किसी राजनीतिक दल के अधीन होकर कार्य करेगा। उन्होंने दावा किया कि करणी सेना के साथ केवल एक वर्ग नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों और बिरादरियों का समर्थन मौजूद है। ऐसे में संगठन अब अपनी राजनीतिक ताकत को चुनावी मैदान में भी परखना चाहता है।
बीजेपी की सहयोगी राजनीति पर Karni Sena ने उठाए सवाल
शाहजहांपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अम्मू ने भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी दलों को दी जा रही राजनीतिक हिस्सेदारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न क्षेत्रीय और छोटे दलों को चुनावी अवसर और सत्ता में भागीदारी दी जा सकती है, तो करणी सेना को चुनाव लड़ने से क्यों रोका जाए। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के लिए एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान व्यक्त किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि संगठन अपनी स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति के आधार पर आगे बढ़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि करणी सेना का यह रुख कुछ क्षेत्रों में चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां संगठन का सामाजिक प्रभाव माना जाता है।
Karni Sena ने UCC और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की उठाई मांग
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान सूरजपाल सिंह अम्मू ने समान नागरिक संहिता (UCC) को उत्तर प्रदेश में लागू करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि जब कुछ राज्यों में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है, तो उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू करने पर विचार होना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग भी उठाई। अम्मू का कहना था कि देश में गौ संरक्षण और उससे जुड़ी सांस्कृतिक भावनाओं को देखते हुए इस विषय पर गंभीर पहल की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन लंबे समय से इस मांग को उठाता रहा है और भविष्य में भी इस मुद्दे पर सक्रिय रहेगा।
सूरजपाल सिंह अम्मू ने मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस महानिदेशक से यह भी आग्रह किया कि संगठन के कार्यकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। उनके अनुसार करणी सेना सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर कार्य करती रही है और अब राजनीतिक स्तर पर भी अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहती है। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले करणी सेना के 50 सीटों पर चुनाव लड़ने के ऐलान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि संगठन अपने राजनीतिक विस्तार की रणनीति को किस प्रकार आगे बढ़ाता है और इसका चुनावी परिदृश्य पर कितना प्रभाव पड़ता है।

