द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ Hormuz को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 94 भारतीय क्रू मेंबर्स के साथ तीन भारतीय क्रूड ऑयल सुपर टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान ने एक बार फिर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों जहाजों ने अत्यधिक संवेदनशील और जोखिमपूर्ण समुद्री क्षेत्र को सफलतापूर्वक पार कर लिया। हालांकि यात्रा के दौरान एक टैंकर ‘देश विभोर’ ने कुछ समय के लिए दक्षिणी मार्ग की ओर रुख किया था, जिससे उसकी सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बढ़ गई थीं। बाद में जहाज ने अपना मार्ग बदलते हुए ईरानी तट की दिशा में वापसी की और निर्धारित रास्ते से आगे बढ़ गया।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम हैं Hormuz से गुज़रे ये टैंकर
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की है कि ‘देश वैभव’, ‘देश विभोर’ और ‘सनमार हेराल्ड’ नामक तीनों टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि ये जहाज 24 जून से 1 जुलाई के बीच अलग-अलग भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेंगे।
सरकार के मुताबिक तीनों जहाजों में कुल 8.60 लाख टन से अधिक कच्चा तेल भरा हुआ है। प्रत्येक टैंकर लगभग 2.85 लाख टन क्रूड ऑयल लेकर भारत आ रहा है। यह खेप भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 10 भारतीय जहाज अभी भी मौजूद हैं। सरकार उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद फिर Hormuz में बढ़ा तनाव
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सीमित रूप से खोला गया था। इस समझौते के तहत ईरान ने अपने यूरेनियम भंडार को कम करने की सहमति जताई थी, जबकि बदले में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा कुछ प्रतिबंधों में राहत देने की बात कही गई थी। इसके बाद कुछ समय के लिए समुद्री यातायात सामान्य होता दिखाई दिया।
हालांकि हालात फिर तनावपूर्ण हो गए जब ईरान की सैन्य कमान ने लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई का हवाला देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने की चेतावनी जारी कर दी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते के तहत किए गए अपने सभी वादों को पूरा नहीं किया, जिससे दोनों देशों के बीच अविश्वास और गहरा गया है।
इसी बीच ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ तकनीकी वार्ता के लिए रवाना हुआ है। माना जा रहा है कि इन बातचीतों के नतीजे क्षेत्रीय तनाव को कम करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल भारत सहित दुनिया के कई देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।




