द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खारिज होने के बाद कांग्रेस नेता Meenakshi Natarajan ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आरोपों का जवाब देते हुए किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया है। बीजेपी ने दावा किया था कि नटराजन का नामांकन रद्द होना कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन कांग्रेस नेता ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए पलटवार किया है।
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि बीजेपी जानबूझकर कांग्रेस के खिलाफ साजिश की कहानी गढ़ रही है ताकि जनता का ध्यान उन मुद्दों से भटकाया जा सके, जिन्हें वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ मानती हैं। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में कोई साजिश हुई है तो यह समझना जरूरी है कि आखिर दो अलग-अलग रिटर्निंग अधिकारियों ने मामूली आधारों पर उनके नामांकन को क्यों खारिज किया।
नटराजन ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उनका उद्देश्य केवल भ्रम फैलाना है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं को कमजोर करने की कोशिशें देश के लिए चिंता का विषय हैं।
Meenakshi Natarajan के नामांकन खारिज होने के बाद शुरू हुआ सियासी विवाद
पीटीआई से बातचीत में मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि कांग्रेस के पास राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल से करीब दस विधायक कम थे। इसके बावजूद पार्टी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपना उम्मीदवार उतारा और चुनावी मुकाबले में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस तथ्य से ही स्पष्ट हो जाता है कि किसी तरह की साजिश का आरोप तर्कहीन और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
बीजेपी ने दावा किया था कि नामांकन रद्द होने के पीछे कांग्रेस की आंतरिक रणनीति हो सकती है, लेकिन नटराजन ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास करती है और चुनावी मुकाबले से पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है।
Meenakshi Natarajan के नामांकन खारिज होने का पूरा मामला क्या है?
दरअसल, मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्र चुनाव अधिकारियों द्वारा खारिज कर दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक नामांकन पत्र में एक लंबित कानूनी नोटिस की जानकारी नहीं दी गई थी, जिसे चुनाव अधिकारियों ने महत्वपूर्ण माना। बताया गया कि नारायणपेट के कांग्रेस नेता कंबम शिवकुमार रेड्डी और श्रीलता नामक व्यक्ति से जुड़े एक स्थानीय विवाद के मामले में अदालत द्वारा जारी नोटिस का उल्लेख नामांकन दस्तावेजों में नहीं किया गया था। इसी आधार पर विपक्षी पक्ष ने उनकी उम्मीदवारी को चुनौती दी और चुनाव अधिकारियों ने नामांकन रद्द करने का फैसला लिया।
चुनावी नियमों के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार को अपने नामांकन हलफनामे में सभी लंबित कानूनी मामलों, नोटिसों और संबंधित जानकारी का पूर्ण खुलासा करना होता है। यदि किसी महत्वपूर्ण कानूनी नोटिस या मामले का उल्लेख नहीं किया जाता है तो चुनाव अधिकारी उस आधार पर नामांकन को अमान्य घोषित कर सकते हैं।
हालांकि, मीनाक्षी नटराजन का कहना है कि उनके खिलाफ जो कार्रवाई हुई है, उसके पीछे कई सवाल हैं और इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप से पेश किया जा रहा है। वहीं, चुनाव अधिकारियों का पक्ष है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप संचालित की गई है। ऐसे में यह विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।



