द लोकतंत्र/ मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में परिसीमन (Delimitation) विधेयक को लेकर बयानबाजी तेज होती जा रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के हालिया बयान के बाद अब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख Eknath Shinde ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों के पास अंततः इस विधेयक का समर्थन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि यदि सुप्रिया सुले और उनकी पार्टी परिसीमन विधेयक का समर्थन करती है तो यह स्वागत योग्य होगा। हालांकि उन्होंने विपक्षी INDIA गठबंधन को इस मुद्दे पर असमंजस की स्थिति में बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता की भावनाओं का भी ध्यान रखना होगा और यदि वह ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध करता है तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। शिंदे ने यह भी कहा कि विपक्ष पहले भी महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर दबाव की राजनीति का सामना कर चुका है। उनके अनुसार, यदि जनता को लगेगा कि विपक्ष विकास और प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों का विरोध कर रहा है, तो इसका असर चुनावी राजनीति पर भी दिखाई देगा।
शिवसेना में शामिल हुए सांसदों पर बोले Eknath Shinde, NDA की एकजुटता का किया दावा
प्रेस वार्ता के दौरान एकनाथ शिंदे के साथ हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए चार सांसद भी मौजूद थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने कहा कि उनकी पार्टी लगातार मजबूत हो रही है और हाल ही में छह सांसद दो-तिहाई बहुमत के साथ उनके नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की है और उसके बाद ही यह राजनीतिक बदलाव हुआ है। शिंदे ने दावा किया कि अब शिवसेना का संसदीय आधार पहले की तुलना में और मजबूत हो चुका है।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जो भी राजनीतिक निर्णय लेती है, वह पूरी रणनीति और कानूनी प्रक्रिया के तहत लेती है। शिंदे के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति में हुए घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि उनकी पार्टी संगठनात्मक रूप से लगातार विस्तार कर रही है।
इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक मुलाकात का अर्थ राजनीतिक समझौता नहीं होता। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के नेताओं के बीच मुलाकात लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
Eknath Shinde ने मुख्यमंत्री पद को लेकर दिया बड़ा संदेश, कहा- हमारा एजेंडा केवल विकास
मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फिलहाल महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी प्रकार की कोई रिक्ति नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता यह चाहते हैं कि उनकी पार्टी का नेता मुख्यमंत्री बने, लेकिन गठबंधन सरकार में सभी सहयोगी दल मिलकर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि जब वह स्वयं मुख्यमंत्री थे, तब भारतीय जनता पार्टी के कई कार्यकर्ता चाहते थे कि देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनें। उसी तरह आज भी प्रत्येक दल के कार्यकर्ताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक अपेक्षाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसमें किसी प्रकार की नाराजगी या असहमति का प्रश्न नहीं है।
शिंदे ने कहा कि वर्तमान में देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं और वह उपमुख्यमंत्री के रूप में सरकार का हिस्सा हैं। उन्होंने दोहराया कि महायुति सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य का विकास, बुनियादी ढांचे का विस्तार और जनहित की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है।
परिसीमन विधेयक को लेकर महाराष्ट्र सहित पूरे देश में राजनीतिक चर्चा तेज है। जहां एक ओर सरकार इसे प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्ष अंतिम विधेयक के मसौदे का इंतजार करने की बात कह रहा है। ऐसे में आगामी संसद सत्र में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा और विभिन्न दलों का अंतिम रुख देश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




