द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : सिंधु जल संधि को लेकर भारत के कड़े रुख के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पानी का मुद्दा उठाया है। किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का हवाला देते हुए पानी को क्षेत्र की “जीवनरेखा” बताया। उन्होंने कहा कि पानी का इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए और साझा समझौतों का सम्मान होना चाहिए।
शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत सिंधु जल संधि से जुड़े तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) के फैसले को पहले ही खारिज कर चुका है। भारत ने 31 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि वह इस संस्था के फैसले को स्वीकार नहीं करता और पहले भी इस तथाकथित संस्था के फैसलों को खारिज करता रहा है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने SCO बैठक के दौरान आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के हर रूप की निंदा की जानी चाहिए। शहबाज ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि बिश्केक में SCO के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की बैठक को संबोधित करना उनके लिए सम्मान की बात थी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान वर्ष 2027 में SCO की अध्यक्षता करने जा रहा है।
सिंधु जल संधि पर शहबाज शरीफ की अपील, बोले- पानी को हथियार न बनाया जाए
SCO के मंच से शहबाज शरीफ ने भारत का सीधे तौर पर नाम लिए बिना सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पानी पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसका इस्तेमाल किसी भी स्थिति में हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने साझा समझौते के तहत जल संसाधनों के इस्तेमाल और संधि के सम्मान की बात कही। पाकिस्तान लंबे समय से सिंधु नदी प्रणाली के पानी को लेकर भारत के साथ विवाद उठाता रहा है। भारत की ओर से सिंधु जल संधि को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने के बाद पाकिस्तान की ओर से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश तेज दिखाई दे रही है।
शहबाज शरीफ ने अपने बयान में SCO की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में SCO क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के तौर पर उभरा है। पाकिस्तान के 2027 में संगठन की अध्यक्षता करने की बात भी उन्होंने रखी। वहीं, आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के बयान पर भी सवाल उठ रहे हैं। शहबाज शरीफ ने SCO मंच से आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की बात कही, जबकि भारत लगातार पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को लेकर आरोप लगाता रहा है।
भारत ने तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को किया खारिज
सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख फिलहाल बेहद स्पष्ट है। विदेश मंत्रालय ने 31 अगस्त को जारी बयान में तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि यह संस्था विश्व बैंक द्वारा संधि की शर्तों के तहत बनाई गई प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए गठित की गई थी।
भारत के अनुसार, इस तथाकथित कोर्ट ने सिंधु जल संधि के तहत अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति को लेकर फैसला दिया है, लेकिन भारत इसे मान्यता नहीं देता। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस संस्था के पहले के फैसलों को भी स्वीकार नहीं करता रहा है। ऐसे में एक तरफ पाकिस्तान SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पानी को “क्षेत्र की जीवनरेखा” बताते हुए सिंधु जल संधि के पालन की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत संबंधित तथाकथित मध्यस्थता प्रक्रिया और उसके फैसलों को कानूनी आधार से परे मानते हुए खारिज कर रहा है।
अब सिंधु जल संधि का मुद्दा भारत-पाकिस्तान के बीच केवल द्विपक्षीय विवाद तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में SCO समेत अन्य वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।




