द लोकतंत्र/ पटना : Bihar में अपना कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं, उद्यमियों और किसानों को दाल प्रसंस्करण के कारोबार से जोड़ने के उद्देश्य से बिहार कृषि विभाग की ओर से दाल प्रसंस्करण इकाई स्थापना योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत नई दाल मिल स्थापित करने वाले पात्र आवेदकों को सरकार की ओर से 25 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा सकता है।
इस योजना का उद्देश्य राज्य में दलहन की प्रोसेसिंग, भंडारण और पैकेजिंग को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों को स्थानीय स्तर पर ही अपनी उपज के बेहतर प्रसंस्करण की सुविधा मिल सके। योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक आवेदक 15 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में आवेदन करने से पहले सब्सिडी, पात्रता, लागत और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी समझना जरूरी है।
दाल मिल लगाने पर 25 लाख रुपये तक का अनुदान
बिहार सरकार की दाल प्रसंस्करण इकाई स्थापना योजना के तहत नई दाल मिल लगाने वाले लाभार्थी को प्रोजेक्ट की कुल पात्र लागत का 33 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। हालांकि, इस सब्सिडी की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तय की गई है। यानी प्रोजेक्ट की पात्र लागत का 33 प्रतिशत या 25 लाख रुपये, दोनों में से जो राशि कम होगी, उतना ही अनुदान स्वीकृत किया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी दाल मिल प्रोजेक्ट की पात्र लागत 60 लाख रुपये है, तो उसका 33 प्रतिशत लगभग 19.80 लाख रुपये होगा। ऐसी स्थिति में लाभार्थी को अधिकतम 19.80 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। सरकारी अनुदान का इस्तेमाल मशीनरी, प्लांट, भवन, वेयरहाउस और स्टोरेज सुविधा तैयार करने जैसे कार्यों में किया जा सकता है। हालांकि, भवन और भंडारण से जुड़े खर्चों पर मिलने वाला अनुदान कुल पात्र सब्सिडी के अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। योजना के तहत स्वीकृत राशि डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
इन जिलों के आवेदक कर सकते हैं आवेदन
फिलहाल दाल प्रसंस्करण इकाई स्थापना योजना बिहार के चुनिंदा जिलों में लागू की गई है। इनमें पटना, नालंदा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, सुपौल, भागलपुर, सीतामढ़ी, जहानाबाद और गया शामिल हैं। इन जिलों के इच्छुक किसान, उद्यमी या अन्य पात्र आवेदक नई दाल मिल स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
योजना के तहत स्थापित की जाने वाली यूनिट नई होनी चाहिए और उसकी क्षमता लगभग 300 किलोग्राम प्रति घंटा निर्धारित की गई है। दाल मिल में इस्तेमाल होने वाली मशीनें BIS मानकों और FSSAI के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर दाल की सफाई, छंटाई, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग होने से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा, दाल मिल खुलने से मशीन ऑपरेटर, पैकिंग स्टाफ, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
आवेदन से पहले इन खर्चों का रखें ध्यान
दाल मिल योजना के लिए आवेदन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि सरकार हर तरह के खर्च पर सब्सिडी नहीं देगी। जमीन खरीदने की लागत अनुदान के दायरे में शामिल नहीं है। इसके अलावा बिजली कनेक्शन, कर्मचारियों का वेतन, कच्चे माल की खरीद, परिवहन और रोजाना संचालन से जुड़े खर्च भी लाभार्थी को स्वयं उठाने होंगे।
आवेदक को प्रोजेक्ट रिपोर्ट में यूनिट की क्षमता, मशीनरी की कीमत, प्रस्तावित स्थान, दलहन की उपलब्धता, उत्पादन प्रक्रिया और संभावित बिक्री का विवरण देना पड़ सकता है। इसलिए आवेदन से पहले बैंक अकाउंट, पहचान पत्र, जमीन या स्थान से जुड़े दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन और प्रोजेक्ट रिपोर्ट जैसे कागजात तैयार रखना बेहतर होगा। आवेदन और योजना से जुड़ी अधिकृत जानकारी के लिए बिहार कृषि विभाग की वेबसाइट dbtagriculture.bihar.gov.in पर जाएं। इसके अलावा Bihar Krishi App के माध्यम से भी योजना की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।




