द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BRICS समिट की मेजबानी और अगुवाई कर रहा है। ऐसे समय में ब्रिक्स की भूमिका, भारत की विदेश नीति और चीन के साथ संबंधों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी ब्रिक्स समिट और भारत-चीन संबंधों को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
इमरान मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट किया है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि समाज और राजनीतिक दलों को इस बात को समझना चाहिए कि आतंकवाद को धर्म के साथ जोड़ना सही नहीं है। कांग्रेस सांसद के मुताबिक, ब्रिक्स एक बड़ा और प्रभावशाली मंच है, जिसकी बदलती विश्व व्यवस्था में अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत की भी इस समूह में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
चीन के साथ विवाद सुलझाने पर इमरान मसूद का जोर
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भारत और चीन के बीच जारी मतभेदों को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच जो भी विवाद और टकराव हैं, उनका समाधान निकाला जाना जरूरी है। मसूद के अनुसार, चीन के साथ व्यापारिक संबंध बने रह सकते हैं, लेकिन इसके साथ भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि भारत और चीन के बीच व्यापार होता है, तो चीन को भारत की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। इमरान मसूद ने यह भी दावा किया कि यदि ब्रिक्स मजबूत होता है, तो इससे अमेरिका के दबदबे को चुनौती मिल सकती है।
कांग्रेस सांसद ने भारत की विदेश नीति में अमेरिका के साथ बढ़ते झुकाव पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में भारत का झुकाव अमेरिका की ओर रहा, जिसकी वजह से देश को नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब भारत की विदेश नीति में संतुलन लाने की दिशा में कुछ सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
मायावती पर भी इमरान मसूद ने कसा तंज
इमरान मसूद ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने हल्के-फुल्के और व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि मायावती कब क्या फैसला लेंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा का संचालन सीमित दायरे में होता है और पार्टी में नेताओं को शामिल करने या जिम्मेदारियां देने के फैसले एक बंद कमरे में लिए जाते हैं।
मसूद का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मायावती ने पार्टी में परिवारवाद और अपने परिवार के सदस्यों की राजनीतिक भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। मायावती ने कहा है कि बसपा अब परिवार के किसी भी सदस्य को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की नीति पर आगे नहीं बढ़ेगी।
मायावती ने आकाश आनंद और परिवार को लेकर साफ किया रुख
मायावती ने हाल ही में अपने भतीजे आकाश आनंद और ईशान आनंद को लेकर भी पार्टी की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पार्टी में परिवार के सदस्यों को केवल रिश्तेदारी के आधार पर राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को लेकर कहा कि उन्हें अकेलेपन और सहयोग की जरूरत के चलते साथ रखा गया था।
हालांकि, मायावती ने यह भी कहा कि उनके भाई की बेटी दीपिका यदि भविष्य में राजनीति में आना चाहती हैं या आनंद कुमार की ओर से उनके लिए अनुरोध किया जाता है, तो उन्हें अवसर देने पर विचार किया जा सकता है। मायावती के इस बयान के बाद बसपा में परिवारवाद, नेतृत्व परिवर्तन और पार्टी के भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।




