द लोकतंत्र/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोक सेवकों की जवाबदेही और प्रशासन में पारदर्शिता को लेकर बड़ा संदेश दिया। उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए CM Yogi Adityanath ने कहा कि किसी भी लोक सेवक के गलत काम करने पर उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ता और अधिकार मिलने के बाद कई बार व्यक्ति का व्यवहार उच्छृंखल और उद्दंड हो जाता है, ऐसे में जरूरत पड़ने पर अधिकारों पर अंकुश जरूरी है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने रामचरितमानस की चौपाई ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यवस्था में ऐसा नियंत्रण होना चाहिए, जिससे हर व्यक्ति अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी का पालन करे।
संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा लोकतंत्र की ताकत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में आम नागरिकों का भरोसा है। यदि जनता का विश्वास संस्थाओं से खत्म हो जाए तो सुशासन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव महसूस करे, यही लोकतंत्र की वास्तविक कसौटी है। केवल संस्था बना देना पर्याप्त नहीं है। शिकायतकर्ता बिना किसी संकोच के अपनी समस्या लेकर आए और उसका नियमानुसार समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके, यह व्यवस्था की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिकायतों का निस्तारण जाति, मत या संप्रदाय के आधार पर नहीं, बल्कि मेरिट के आधार पर होना चाहिए। साथ ही शिकायत व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
PDS में तकनीक से हेराफेरी पर लगी लगाम
मुख्यमंत्री ने सरकार के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2017 में जनता दर्शन में आने वाली करीब 60 प्रतिशत शिकायतें सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS से जुड़ी थीं। ई-पॉस मशीनों और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश काफी कम हुई है। योगी ने कहा कि अब करीब 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और PDS से संबंधित शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।
जमीन विवादों के समाधान में तकनीक का इस्तेमाल
राजस्व मामलों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े करीब 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन मामलों का समाधान किया गया, हालांकि इस दौरान करीब नौ लाख नए मामले भी सामने आए। उन्होंने कहा कि जमीन की पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे भूमि की नाप-जोख में पारदर्शिता बढ़ी है।
बिचौलियों का दौर खत्म
योगी आदित्यनाथ ने जनधन खातों और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन में बिचौलियों की भूमिका रहती थी, लेकिन अब करीब 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि AI, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के प्रभावी इस्तेमाल से प्रशासन में पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सकता है।
अगले 50 वर्षों का रोडमैप तैयार करने की अपील
CM Yogi ने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की यात्रा का दस्तावेजीकरण करने और मामलों के निस्तारण व कार्रवाई का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की यात्रा पर आधारित प्रदर्शनी और लघु फिल्म भी देखी। कार्यक्रम में लोकायुक्त जस्टिस संजय मिश्र सहित उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह और सुरेंद्र कुमार यादव मौजूद रहे।




