द लोकतंत्र/नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मी तेज है, लेकिन मतदान से पहले मामला कोर्ट तक पहुंच गया है। DUSU Election 2026 में पांच छात्रों की उम्मीदवारी पर नामांकन जांच के दौरान उठे सवालों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें राहत दी है। वहीं, चुनाव में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों की भागीदारी को चुनौती देने वाली याचिका पर भी अदालत ने सुनवाई की मंजूरी दे दी है।
पांच उम्मीदवारों को कोर्ट से राहत
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अमित बंसल ने नामांकन पत्रों में कथित खामियों के चलते चुनाव से बाहर किए गए पांच छात्रों को राहत दी। कोर्ट ने उन्हें कैंपस लॉ सेंटर और श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स में अलग-अलग पदों के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति दी है।DUSU Election 2026 के लिए मतदान 18 सितंबर को होना है और मतगणना 19 सितंबर को प्रस्तावित है। इस बार केंद्रीय पैनल के चार प्रमुख पदों के लिए 20 उम्मीदवार मैदान में हैं।
राजनीतिक दखल पर कोर्ट में सवाल
दूसरी ओर, DUSU Election 2026 में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों की कथित भूमिका को लेकर दाखिल याचिका भी चर्चा में है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। मामले में सुनवाई 16 सितंबर को होनी है।
याचिकाकर्ता DU का ही स्टूडेंट है। इसने आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ चुनावों को राजनीतिक दलों के प्रभाव से मुक्त रखने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को पूरी तरह लागू नहीं किया। याचिका में राजनीतिक छात्र संगठनों से जुड़े उम्मीदवारों की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए चुनाव के लिए नई उम्मीदवार सूची जारी करने की मांग भी की गई है।
लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें बनीं आधार
याचिका में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि छात्रसंघ चुनावों को राजनीतिक दलों के प्रत्यक्ष प्रभाव से अलग रखा जाना चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण और छात्र राजनीति की स्वतंत्रता बनी रहे। याचिका में SFI-AISA गठबंधन, NSUI, ABVP और आम आदमी पार्टी से जुड़े छात्र संगठन जैसे समूहों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन संगठनों की चुनावी भागीदारी को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की सुनवाई और आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या है लिंगदोह समिति
लिंगदोह समिति (Lyngdoh Committee) भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनावों में सुधार, पारदर्शिता और शांति बनाए रखने के लिए बनाई गई एक दिशानिर्देश समिति है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2005 में भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेम्स माइकल लिंगदोह की अध्यक्षता में इस छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसके नियमों को देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अनिवार्य कर दिया।
DUSU चुनाव में राजनीति का मुद्दा क्यों अहम?
दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से छात्र राजनीति और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संबंधों को लेकर चर्चा में रहता है। इस बार भी प्रमुख छात्र संगठन मैदान में हैं और कैंपस में छात्र सुरक्षा, हॉस्टल, शिक्षा और छात्र सुविधाएं जैसे मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
अब हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि छात्र राजनीति की सीमा कहां तक होनी चाहिए और राजनीतिक संगठनों की भूमिका को किस तरह देखा जाए। फिलहाल, पांच उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की राहत मिल चुकी है, जबकि राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़ी याचिका पर अदालत की अहम फैसले का इंतजार है।



