द लोकतंत्र/India Russia Relations: विदेश मंत्री S Jaishankar ने भारत और रूस के रिश्तों को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल मौजूदा रणनीतिक जरूरतों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि दशकों के भरोसे और साझा अनुभवों से बने हैं। जर्मनी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत अपने विदेश नीति संबंधों को दूसरे देशों के नजरिए से नहीं, बल्कि अपने अनुभवों के आधार पर तय करता है।
जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि रूस और तत्कालीन सोवियत संघ ने ऐसे दौर में भारत का साथ दिया, जब देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के सामने गंभीर चुनौतियां थीं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस के साथ भारत के संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।
हर देश अपने अनुभवों के आधार पर रिश्ते तय करता है: S Jaishankar
जर्मनी में आयोजित कार्यक्रम में S Jaishankar ने कहा कि कोई भी देश अपने ऐतिहासिक अनुभवों को भूलकर विदेश नीति नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूरोप रूस को लेकर भारत के नजरिए से नहीं सोच सकता, उसी तरह भारत भी रूस के साथ अपने संबंधों को यूरोपीय नजरिए से तय नहीं कर सकता।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का रूस के साथ लंबे समय का अनुभव सकारात्मक रहा है। यही वजह है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बावजूद दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसा कायम है।
जब पश्चिमी देशों का झुकाव पाकिस्तान की ओर था
S Jaishankar ने भारत-रूस संबंधों के ऐतिहासिक पक्ष को सामने रखते हुए 1950 के दशक का उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि उस दौर में कई पश्चिमी देश पाकिस्तान की सैन्य सरकार के साथ खड़े थे, जबकि सोवियत संघ ने भारत के साथ सहयोग और समर्थन का रास्ता चुना। भारत और सोवियत संघ के संबंधों में 1971 का युद्ध भी एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान अमेरिका की ओर से भारत के खिलाफ नौसैनिक शक्ति भेजे जाने की स्थिति में सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया था। यही ऐतिहासिक अनुभव आज भी भारत की रूस को लेकर रणनीतिक सोच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
1970-80 के दशक में और गहरे हुए रिश्ते
विदेश मंत्री S Jaishankar के मुताबिक भारत और सोवियत संघ के बीच साझेदारी 1970 और 1980 के दशक में और मजबूत हुई। इस दौरान रक्षा, परमाणु सहयोग और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध गहरे हुए। हालांकि, समय के साथ भारत-रूस संबंधों का स्वरूप भी बदला है। आज दोनों देशों के बीच रक्षा और परमाणु सहयोग के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में भी व्यापक साझेदारी है।
रूस से तेल खरीदने पर पश्चिम के सवालों का S Jaishankar देते रहे हैं जवाब
भारत और रूस के मौजूदा संबंधों में ऊर्जा सहयोग एक अहम पहलू बन चुका है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस से भारत की तेल खरीद पर कई बार सवाल उठाए हैं। विदेश मंत्री S Jaishankar पहले भी भारत के रुख का बचाव करते हुए स्पष्ट कर चुके हैं कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले करता है।
भारत का तर्क रहा है कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच उसे अपने नागरिकों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और कीमतों को भी ध्यान में रखना होगा। जयशंकर का ताजा बयान भी इसी व्यापक विदेश नीति दृष्टिकोण को रेखांकित करता है—भारत अपने रिश्ते किसी तीसरे देश की पसंद या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हित और दशकों के अनुभव के आधार पर तय करता है।
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