द लोकतंत्र/देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी खींचतान सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता Harish Rawat ने पार्टी हाईकमान की ओर से अपनी यात्रा रोकने की सलाह के बावजूद कार्यक्रम जारी रखने का ऐलान किया है। रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी आगामी गतिविधियों की जानकारी भी साझा की है।
कांग्रेस की ओर से रावत को राज्य में किसी भी समानांतर राजनीतिक कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाने की सलाह दी गई थी। पार्टी ने इस संबंध में उन्हें दिल्ली भी तलब किया था। इसके बावजूद रावत ने अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को जारी रखने का संकेत दिया है।
Harish Rawat बोले- ‘अब रुकना नहीं है’
Harish Rawat ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए उनका संकल्प मजबूत है और ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ के दौरान अब रुकना नहीं है। उन्होंने लिखा, “चुनौती बड़ी है। लेकिन उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए हमारा संकल्प भी दृढ़ है! … अब रुकना नहीं है।
उठो, चलो… राज्य में बदलाव लाना है और कांग्रेस को वापस लाना है!” रावत ने अपनी पोस्ट में जसपुर से हल्द्वानी तक कार्यक्रम जारी रखने की बात कही। उन्होंने लोगों से संवाद करने और ‘देवभूमि के हक की लड़ाई’ को आगे बढ़ाने की अपील भी की।
कांग्रेस हाईकमान ने क्यों जताई नाराजगी?
दरअसल, कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने 1 अक्टूबर को हरीश रावत को एक पत्र लिखा था। इसमें रावत की ओर से हाल के दिनों में दिए गए कुछ बयानों और राज्य में निकाली जा रही यात्रा को लेकर नाराजगी जताई गई थी। सैलजा ने पत्र में कहा था कि उन्हें जानकारी मिली है कि Harish Rawat राज्य में एक ‘यात्रा’ निकाल रहे हैं, लेकिन इसके संबंध में न तो प्रदेश प्रभारी से और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। ऐसे समय में पार्टी के समानांतर कोई कार्यक्रम कांग्रेस के हित में नहीं होगा।
सैलजा ने Harish Rawat से यात्रा रोकने का किया था अनुरोध
कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत से उनकी यात्रा को आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया था। पत्र में उन्होंने Harish Rawat के हालिया बयानों का भी जिक्र किया और पार्टी की एकजुटता को चुनाव से पहले महत्वपूर्ण बताया। उत्तराखंड में अगले साल फरवरी-मार्च के आसपास विधानसभा चुनाव संभावित हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस के भीतर संगठन, नेतृत्व और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।
चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चुनौती
Harish Rawat का अपनी यात्रा जारी रखने का ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब कांग्रेस उत्तराखंड में सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के सामने एक तरफ संगठन को मजबूत करने और दूसरी तरफ नेताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की चुनौती है। अब रावत के अगले कार्यक्रमों और कांग्रेस हाईकमान की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और रावत के बीच इस मतभेद को किस तरह सुलझाया जाता है।
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