द लोकतंत्र/नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई होनी है। सुनवाई से ठीक पहले CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के पदाधिकारी सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता और मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
सौरभ दास ने आरोप लगाया कि बंगाल और बिहार में SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया को आगे बढ़ने देने में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका रही है। उन्होंने CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची का नाम लेते हुए कहा कि अदालत ने युवाओं के वोट देने के अधिकार और राज्यों में चुनाव से जुड़े मुद्दों पर समय रहते जरूरी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं की।
अब कोर्ट जो चाहे करे, किसी को फर्क नहीं पड़ता:CJP
सौरभ दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जिन जजों ने बंगाल और बिहार में SIR प्रक्रिया को बिना रुकावट आगे बढ़ने दिया, उन्हें अब जो करना है, वे कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट की इस मामले में भूमिका के कारण उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत की कथित भूमिका से ‘जेन जी’ के वोट देने के अधिकार और राज्यों में चुनाव से जुड़े अधिकार प्रभावित हुए हैं। हालांकि, ये सौरभ दास के आरोप हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
समय पर याचिकाओं की सुनवाई नहीं होने का आरोप
CJP पदाधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण मामलों में जरूरी याचिकाओं पर समय रहते सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने महाराष्ट्र में सरकार गिरने, राजनीतिक दलों में टूट और दिल्ली में संवैधानिक संकट जैसे मामलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में कथित तौर पर भाजपा की इच्छा के अनुरूप परिस्थितियां बनीं और न्यायपालिका की भूमिका को लेकर सवाल उठे। सौरभ दास ने इसे न्यायपालिका के लिए ‘बड़ा धब्बा’ बताया। उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट की बेंच CEC पर चाहे जो फैसला करे, लोगों की नजर में उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो चुकी है। उनके मुताबिक, अदालत की विश्वसनीयता का फैसला देश की जनता और युवा करेंगे।
आज सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले की CJI करेंगे सुनवाई
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और निर्वाचन आयोग की शक्तियों से जुड़े दो मामलों पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसमें जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो गया है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली,CEC और SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज है। CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ़ हैं।
चुनाव आयुक्तों की भूमिका को लेकर भी उठे सवाल
हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा था कि कुछ फैसले उनकी सिफारिश या जानकारी के बिना लिए गए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर वोटर सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे और CEC के फ़ैसलों पर सवाल उठाए थे।
CEC को पद से हटाने और शक्तियों पर रोक की मांग
पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कानून के तहत पूरे निर्वाचन आयोग में निहित हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि CEC द्वारा अकेले ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो उन कार्यों को अनधिकृत घोषित किया जाए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि मामले की अंतिम सुनवाई लंबित रहने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में काम करने से रोका जाए।
साथ ही, इस अवधि में आयोग का कामकाज चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सर्वसम्मति से चलाने तथा भविष्य में रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए ऐसी समिति की सिफारिश लेने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश भी शामिल हों। वैसे तो संविधान की बात करने वाले CJP को देश की किसी भी संवैधानिक निकाय पर भरोसा नहीं है, अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की सुनवाई पर हैं, जहां निर्वाचन आयोग की शक्तियों, CEC के अधिकारों और SIR से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर अदालत का रुख सामने आ सकता है।
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