द लोकतंत्र/राजनीति न्यूज़: Arvind Kejriwal ने शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक ने मौजूदा हालात की तुलना आपातकाल से करते हुए आरोप लगाया कि देश में तानाशाही जैसी स्थिति बन गई है। यह विवाद Cockroach Janta Party (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सामने आया। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी आरोप लगाए और चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया। हालांकि, ये आरोप केजरीवाल के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
आपातकाल से भी बदतर हालात: केजरीवाल
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए किए गए सुरक्षा इंतजाम और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई आपातकाल से भी बदतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में तानाशाही जैसी स्थिति बन गई है।
AAP संयोजक ने दावा किया कि प्रदर्शन से जुड़े लोगों को विमान से उतरने के बाद हिरासत में लिया जाना सरकार की चिंता को दर्शाता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश बताया। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर भी आरोप लगाए और कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की।
Jantar Mantar पर प्रदर्शन को लेकर विवाद
यह पूरा मामला Cockroach Janta Party के प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। संगठन और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनकी आपत्तियां चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और वोटों को हटाए जाने के आरोप उठाए। केजरीवाल ने भी ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल किए। हालांकि, मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों और चुनाव में कथित गड़बड़ी के आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित रैली को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस का कहना था कि आयोजकों ने अनुमति के लिए देर से आवेदन किया था। इसके बाद राजधानी के मध्य हिस्से में सुरक्षा बढ़ाई गई और प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई।
केजरीवाल को भी हिरासत में लिया गया
10 अक्टूबर को केजरीवाल अपने आवास से पैदल मार्च करते हुए जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। AAP ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन से पहले केजरीवाल के आवास के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई थी, जिससे उनके लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।
केजरीवाल ने एक दिन पहले कहा था कि वह अपने परिवार के साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने युवाओं से भी प्रदर्शन में भाग लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का समर्थन करने की अपील की थी। प्रदर्शन के दौरान CJP से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों को भी हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।
चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
दिल्ली में इस घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग के कामकाज, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया। विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई।
केजरीवाल ने अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, दोनों के इस्तीफे की मांग की। वहीं, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और सुरक्षा व्यवस्था के कारण राजधानी में आम लोगों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आईं। इस पूरे मामले में मुख्य विवाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों और प्रदर्शन को रोकने के लिए की गई पुलिस कार्रवाई पर केंद्रित है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।
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