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सुकमा कनेक्ट 2.0 को राष्ट्रीय पहचान, 1.17 करोड़ रुपये मंजूर; दूरस्थ गांवों तक पहुंचेंगी सरकारी सेवाएं

Sukma Connect 2.0 gains national recognition; ₹1.17 crore sanctioned; government services to reach remote villages.

द लोकतंत्र/ रायपुर : छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और आदिवासी गांवों में रहने वाले लोगों तक सरकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं की पहुंच आसान बनाने के लिए शुरू की गई पहल ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग ने इस परियोजना को ‘स्टेट कोलैबोरेशन इनिशिएटिव’ के तहत देश के 14 चयनित प्रस्तावों में शामिल किया है। इसके लिए 1.17 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी भी दी गई है।

इस पहल का उद्देश्य उन ग्रामीणों को उनके गांव के नजदीक ही जरूरी सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिन्हें सामान्य प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। परियोजना के दूसरे चरण में तकनीक, डिजिटल निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के जरिए सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की योजना है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासनिक सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में सुकमा कनेक्ट 2.0 को आगे बढ़ाया जा रहा है। जिले के अंदरूनी इलाकों में रहने वाले नागरिकों को आधार, पहचान पत्र और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।

24 घंटे बहुभाषी कॉल सेंटर, गांवों तक पहुंचेंगी मोबाइल सेवा वैन

‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ के तहत चौबीसों घंटे संचालित होने वाला बहुभाषी कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय बोलियों में लोगों की समस्याएं सुनना और उन्हें सरकारी सेवाओं तथा योजनाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे उन नागरिकों को विशेष मदद मिलने की उम्मीद है, जिन्हें भाषा संबंधी कठिनाइयों या भौगोलिक दूरी के कारण सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है।

परियोजना के अंतर्गत दो मोबाइल सेवा वैन भी संचालित की जाएंगी। ये वैन दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर आधार सहित विभिन्न नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगी। इससे ग्रामीणों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय या दूसरे शहरी क्षेत्रों तक जाने की जरूरत कम हो सकती है।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाना भी है। कॉल सेंटर और मोबाइल सेवा वैन के माध्यम से नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं, जरूरी दस्तावेजों और संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

पहले चरण में 40 हजार से अधिक कॉल, शिक्षा व्यवस्था की भी होगी डिजिटल निगरानी

सुकमा में मार्च 2026 से संचालित केंद्रीकृत निगरानी एवं नियंत्रण केंद्र (CMCC 1.0) के माध्यम से अब तक 40 हजार से अधिक फोन कॉल किए जा चुके हैं। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, इस पहल के तहत 10,078 आयुष्मान कार्ड और 11,103 नए मतदाता पहचान पत्र बनाए गए हैं। इसके अलावा 5,788 आधार नामांकन और 27,391 बायोमेट्रिक अपडेट किए गए हैं।

आजीविका के क्षेत्र में भी इस परियोजना के तहत गतिविधियां संचालित की गई हैं। जिले में 452 महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है और 4,745 परिवारों को आजीविका से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ा गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य नागरिक सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ग्रामीण परिवारों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है।

परियोजना के अगले चरण में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी ध्यान दिया जाएगा। सुकमा जिले के 198 आवासीय विद्यालयों और आश्रमों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू करने की योजना है। इसके साथ ही स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षणिक स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि जरूरतमंद बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ा जा सके। सरकारी योजनाओं, नागरिक सुविधाओं और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी के लिए कलेक्टर स्तर पर एक डिजिटल डैशबोर्ड भी तैयार किया जाएगा। इससे प्रशासन को विभिन्न योजनाओं की प्रगति और सेवाओं की उपलब्धता की जानकारी एक ही मंच पर मिल सकेगी।

कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में जिले में CMCC 1.0 का संचालन किया जा रहा है। अब सुकमा कनेक्ट 2.0 के जरिए इस व्यवस्था को और व्यापक बनाने की तैयारी है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुंच, प्रशासनिक समन्वय और नागरिकों की सुविधा को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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