द लोकतंत्र/राष्ट्रीय न्यूज़: देश में Sewer Cleaning Deaths का सिलसिला 2026 में भी जारी है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 31 लोगों की मौत हुई है। इनमें से केवल नौ मामलों में मृतकों के परिवारों को मुआवजे का पूरा भुगतान किया गया है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में हरियाणा में सबसे ज्यादा आठ मौतें दर्ज की गईं।
महाराष्ट्र और दिल्ली में छह-छह मौतें
NCSK के अनुसार 2026 में हरियाणा के बाद महाराष्ट्र और दिल्ली में छह-छह लोगों की मौत हुई। उत्तर प्रदेश में तीन मौतें दर्ज की गईं, जबकि गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में दो-दो मौतें सामने आईं। ये आंकड़े सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई मौतों से संबंधित हैं।
आयोग के मुताबिक, इन मामलों में मुआवजे की स्थिति भी अलग-अलग है। 31 मृतकों में से नौ मामलों में ही मुआवजे का पूरा भुगतान हुआ है। NCSK विभिन्न राज्यों और संबंधित अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर ऐसे मामलों की निगरानी करता है। आयोग ने बताया है कि उसके आंकड़े नए मामलों और प्राप्त होने वाली जानकारी के साथ अपडेट हो सकते हैं।
2025 में 51 मौतें, 28 मामलों में पूरा भुगतान
आंकड़ों की तुलना करें तो वर्ष 2025 में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 51 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 28 मामलों में मुआवजे का पूरा भुगतान किया गया। उस साल उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10 मौतें दर्ज हुई थीं, जबकि हरियाणा और दिल्ली में सात-सात लोगों की जान गई थी।
वर्ष 2024 में ऐसी 54 मौतें दर्ज की गई थीं और 43 मामलों में मुआवजे का पूरा भुगतान हुआ था। इससे पता चलता है कि मौत के मामलों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों तक मुआवजा पहुंचाने की प्रक्रिया भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
2016 से 2026 के बीच 773 मौतें दर्ज
NCSK के आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2026 तक के 11 साल की अवधि में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान कुल 773 मौतें दर्ज की गईं। इनमें 677 मामलों में मुआवजे का पूरा भुगतान किया गया। इस अवधि में तमिलनाडु और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 100-100 मौतें दर्ज हुईं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 98, गुजरात में 86 और हरियाणा में 85 मौतें दर्ज की गईं।
वर्षवार आंकड़ों में 2019 में सबसे ज्यादा 131 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद 2017 में 113 और 2022 में 88 मौतें हुईं। आयोग ने बताया कि ये आंकड़े जिला और पुलिस अधिकारियों, राज्य सरकारों, विभागों तथा अन्य आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किए गए हैं।
सीवर की खतरनाक सफाई पर कानूनी रोक
सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक तरीके से सफाई पर कानून में रोक है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 की धारा 7 सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई पर प्रतिबंध लगाती है। सरकार ने ऐसे काम को कम करने के लिए NAMASTE Scheme के तहत मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा दिया है।
NCSK की जानकारी के अनुसार, सीवर की सफाई के दौरान मौत होने पर मृतक के परिवार को सुप्रीम कोर्ट के 20 अक्टूबर 2023 के फैसले के तहत 30 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। वहीं, सीवर की असुरक्षित सफाई के कारण दिव्यांगता होने पर भी निर्धारित परिस्थितियों में मुआवजे का प्रावधान है।
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