द लोकतंत्र/राष्ट्रीय न्यूज़: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि Dussehra धर्म और न्याय की अधर्म और अन्याय पर विजय का प्रतीक है। राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान श्रीराम को धर्म और नैतिक आचरण का स्वरूप माना जाता है। उन्होंने लोगों से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के उच्च आदर्शों को अपनाने और समावेशी समाज तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
द्वारका में दशहरा समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मु मंगलवार को नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 स्थित श्री राम लीला समिति के मैदान में आयोजित Dussehra समारोह में शामिल हुईं। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और द्वारका श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष आकाश गेहलोत समेत कई लोग मौजूद रहे। समारोह के दौरान रावण दहन की पारंपरिक रस्म भी हुई।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि देश और विदेश में होने वाली रामलीला के जरिए लाखों लोग भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े आदर्शों को समझने और उन पर विचार करने का अवसर पाते हैं। उन्होंने श्रीराम को धर्म, नैतिकता और सदाचार से जोड़ा और कहा कि विजयादशमी इन मूल्यों को याद करने का अवसर देती है।
रामायण में सामाजिक समानता का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने रामायण में दिए गए सामाजिक सद्भाव और समानता के संदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने भगवान श्रीराम और निषादराज की मुलाकात तथा माता शबरी के बेर स्वीकार करने की घटनाओं का उदाहरण दिया। राष्ट्रपति के अनुसार, ये प्रसंग समाज में आपसी स्नेह, समानता और सद्भाव की भावना को सरल तरीके से सामने रखते हैं।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि इससे जुड़े आदर्श लोगों को नैतिकता, कर्तव्य और न्याय के मूल्यों पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं। राष्ट्रपति ने देशवासियों से इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेने की अपील की।
रामायण में पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
राष्ट्रपति ने रामायण में प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े संदेशों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामायण में जल और वायु की शुद्धता, पेड़-पौधों और बगीचों की सुंदरता तथा इंसानों, पशु-पक्षियों के बीच संबंधों का उल्लेख मिलता है।
उन्होंने काकभुशुंडी, जटायु और जामवंत जैसे पात्रों का उदाहरण देते हुए प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना पर जोर दिया। समुद्र पर पुल निर्माण में छोटे जीवों तक के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि रामायण में प्रकृति और उसके प्रत्येक हिस्से के महत्व को भी रेखांकित किया गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति के संरक्षण की यह भावना भारतीय परंपरा के साथ-साथ संविधान में भी दिखाई देती है। संविधान नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों में नदियों, झीलों, जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा और संरक्षण को भी शामिल करता है।
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