द लोकतंत्र/राष्ट्रीय न्यूज़: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C.R. Patil ने देश में जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए Water Research, तकनीकी नवाचार और मजबूत डेटा सिस्टम पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जल क्षेत्र की मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध, विश्वसनीय आंकड़ों और आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है। सरकार जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए रिसर्च संस्थानों, वैज्ञानिकों, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी काम कर रही है।
जल क्षेत्र में शोध और तकनीक की जरूरत
पाटिल ने जल सुरक्षा को देश के विकास से सीधे जुड़ा विषय बताया। उनके अनुसार, पानी से जुड़ी चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बल्कि Research, Innovation और Jan Bhagidari के संयुक्त प्रयास से किया जा सकता है। जल संसाधनों की उपलब्धता, भूजल, पानी की गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिए लगातार वैज्ञानिक अध्ययन और बेहतर डेटा की जरूरत है।
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, जल क्षेत्र में अब तक 315 से अधिक R&D प्रोजेक्ट किए जा चुके हैं। इनमें 113 परियोजनाओं को मंत्रालय की ओर से सीधे सहयोग दिया गया है। इन शोध परियोजनाओं का उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, भूजल की स्थिति, जल गुणवत्ता और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।
ISRO के साथ बढ़ेगा सहयोग
जल संसाधनों की निगरानी और आकलन में अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी दिशा में जल शक्ति मंत्रालय और ISRO के बीच सहयोग बढ़ाया गया है। दोनों संस्थानों ने जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए सैटेलाइट आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर काम करने के लिए समझौता किया है।
इस सहयोग के तहत भूजल, जल संसाधन प्रबंधन, जलवायु लचीलापन और जल उपयोग दक्षता जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे जल संसाधनों से जुड़े फैसलों में वास्तविक समय के डेटा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को मजबूत किया जा सकता है।
MAHA on Water से रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने जल क्षेत्र में उच्च प्रभाव वाले शोध को बढ़ावा देने के लिए MAHA on Water पहल शुरू की है। यह जल शक्ति मंत्रालय और Anusandhan National Research Foundation (ANRF) की संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु लचीलापन और पानी के बेहतर इस्तेमाल से जुड़े क्षेत्रों में नई तकनीक और व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।
इसके अलावा BHARAT-WIN पोर्टल के जरिए स्टार्टअप्स और MSMEs से जल क्षेत्र में नए उत्पाद और प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य शोध को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे जमीन पर लागू होने वाले समाधानों में बदलना है।
डेटा आधारित जल प्रबंधन पर जोर
जल प्रबंधन में मजबूत डेटा सिस्टम की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। विश्वसनीय आंकड़ों की मदद से पानी की उपलब्धता, मांग, भूजल स्तर, जल गुणवत्ता और भविष्य की जरूरतों का बेहतर आकलन किया जा सकता है। इसी आधार पर सरकार जल क्षेत्र में डेटा आधारित निर्णय लेने, डिजिटल तकनीक और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे रही है।
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