…काश यह खबर झूठी होती, काश कोई रास्ता होता जिससे हम तुम्हें वापस ला पाते ‘पार्थ’
द लोकतंत्र/ सुदीप्त मणि त्रिपाठी : कभी कभी दर्द इतना गहरा होता है कि शब्द खो जाते हैं। समझ नहीं आता कि अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करें। पार्थ की मौत ने हमें ऐसे ही सदमे में डाल दिया है, जहां से निकलना नामुमकिन लग रहा है। ऐसा लगता है जैसे वक्त ने अचानक सब […]









