बढ़ती जनसंख्या बनाम घटती सुविधाएं, दिल्ली का संतुलन बिगड़ता क्यों जा रहा है?
द लोकतंत्र/ एहसान ख़ान : दिल्ली, एक समय था जब ये शहर खुले आसमान, बग़ीचों की हरियाली और फ़िज़ाओं में घुली रवायतों के लिए जाना जाता था। लेकिन बदलते वक़्त के साथ धुँधलके में कहीं खो गई वह दिल्ली। ‘दिल वालों की दिल्ली’ की पहचान अब शोर, भीड़, धुंध और थकते इंसानी चेहरों में कहीं […]









