द लोकतंत्र : भारत की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा संस्था, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), अपने परिचालन ढांचे में एक युगांतकारी परिवर्तन की तैयारी कर रही है। वर्षों से चली आ रही पीएफ निकासी की जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया अब ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) के आगमन के साथ समाप्त होने वाली है। ईपीएफओ ने आधिकारिक तौर पर नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ एक रणनीतिक गठबंधन किया है, जिसके तहत अगले दो से तीन महीनों में पीएफ की राशि सीधे यूपीआई आईडी के माध्यम से निकाली जा सकेगी। यह कदम न केवल करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह सरकारी सेवाओं के ‘फिनटेक’ एकीकरण (Fintech Integration) का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
निकासी की नई कार्यप्रणाली: तकनीकी रूपरेखा
वर्तमान में पीएफ निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद भी ‘ऑटो-सेटलमेंट’ मोड में कम से कम 72 घंटों का समय लगता है। नई व्यवस्था इस प्रतीक्षा अवधि को शून्य करने का प्रयास करेगी।
- भीम ऐप (BHIM App) से शुरुआत: प्रारंभिक चरण में यह सुविधा विशेष रूप से सरकारी ‘भीम ऐप’ पर उपलब्ध कराई जाएगी। उपयोगकर्ता को ऐप के भीतर अपने यूएएन (UAN) और यूपीआई आईडी को सत्यापित करना होगा। बीमारी, शिक्षा या विवाह जैसे ‘अनुमत श्रेणियों’ (Permitted Categories) के तहत आवेदन करते ही बैकएंड सिस्टम रियल-टाइम में डेटा का मिलान करेगा।
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की भूमिका: सत्यापन पूर्ण होते ही ईपीएफओ का भुगतान भागीदार एसबीआई, इंस्टेंट पेमेंट गेटवे के माध्यम से राशि सीधे उपयोगकर्ता के यूपीआई-लिंक्ड बैंक खाते में स्थानांतरित कर देगा। यह प्रक्रिया उतनी ही सरल होगी जितनी कि किसी क्यूआर कोड को स्कैन कर भुगतान करना।
सीमाएं और सुरक्षा उपाय: विनियामक ढांचा
सुविधा के साथ सुरक्षा सुनिश्चित करना ईपीएफओ की प्राथमिकता है। यूपीआई ट्रांजेक्शन की प्रकृति को देखते हुए, आरबीआई के नियमों के अधीन कुछ सीमाएं निर्धारित की गई हैं।
- निकासी की सीमा (Withdrawal Limit): अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभ में सुरक्षा कारणों से संपूर्ण पीएफ राशि यूपीआई के माध्यम से नहीं निकाली जा सकेगी। इसकी एक अधिकतम सीमा तय की जाएगी, जिस पर वर्तमान में वित्तीय विशेषज्ञों की समिति विचार कर रही है।
- फिनटेक विस्तार: सफलतापूर्वक परीक्षण के उपरांत, इस सेवा को फोनपे, गूगल पे और पेटीएम जैसे अन्य निजी फिनटेक प्लेटफॉर्म्स तक विस्तारित किया जाएगा।
- मैनुअल हस्तक्षेप का अंत: यह प्रणाली मानवीय त्रुटि और फाइलों के अटके रहने की संभावना को न्यूनतम कर देगी, जो विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक सिद्ध होगी।
भविष्य का प्रभाव: सामाजिक सुरक्षा का डिजिटलीकरण
- विशेषज्ञों का मानना है कि ईपीएफओ का यह निर्णय वैश्विक स्तर पर एक नजीर पेश करेगा। 2026 तक भारत की अधिकांश वित्तीय सेवाएं रीयल-टाइम मोड पर स्थानांतरित हो रही हैं, ऐसे में पीएफ जैसे महत्वपूर्ण कोष का यूपीआई से जुड़ना ‘वित्तीय सुगमता’ (Financial Ease of Living) की दिशा में मील का पत्थर है। यह न केवल संस्था की कार्यकुशलता को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य निधि के प्रति आम जनता के भरोसे को भी सुदृढ़ करेगा।
निष्कर्षतः, ईपीएफओ का यूपीआई आधारित निकासी मॉडल डिजिटल इंडिया के संकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। वह समय दूर नहीं जब पीएफ का पैसा निकालना किसी संदेश भेजने जितना सामान्य होगा। यद्यपि शुरुआती पाबंदियां और तकनीकी चुनौतियां हो सकती हैं, किंतु इस नवाचार का दीर्घकालिक लाभ पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के रूप में परिलक्षित होगा।

