द लोकतंत्र : आज के डिजिटल युग में बच्चे पढ़ाई, गेमिंग और मनोरंजन के लिए घंटों तक मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी के सामने बैठे रहते हैं। यह आदत धीरे-धीरे बच्चों की सेहत पर गंभीर असर डाल रही है। जहां एक ओर आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं शरीर के कई अन्य अंग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
आंखों पर असर
लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रखने से बच्चों की आंखों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। इससे डिजिटल आई स्ट्रेन, ड्राई आई और ब्लर विजन (धुंधलापन) जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, लगातार स्क्रीन पर देखने से मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) का खतरा भी बढ़ जाता है।
हड्डियां और मांसपेशियां
ज्यादा देर तक बैठे रहने से बच्चों की कमर, गर्दन और पीठ में दर्द जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर और शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है।
दिल और मोटापा
स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चे कम सक्रिय हो जाते हैं। इससे शरीर में फैट बढ़ता है, और दिल से जुड़ी समस्याएं जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापा होने की संभावना बढ़ जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों को रोजाना कम से कम 1 घंटे की फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है ताकि उनका दिल मजबूत रहे।
नींद पर असर
अगर बच्चे सोने से पहले मोबाइल या टैबलेट देखते हैं, तो इससे नींद की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे बच्चे देर रात तक जागते रहते हैं और दिनभर थकान महसूस करते हैं।
मेंटल हेल्थ
लगातार सोशल मीडिया और गेमिंग में व्यस्त रहने से बच्चों की मानसिक सेहत पर भी खतरा बढ़ जाता है। कई बच्चे ऑनलाइन कंटेंट देखकर दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं, जिससे उनमें तनाव, चिंता और आत्मसम्मान की कमी जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं।
बच्चों का स्क्रीन टाइम कैसे करें कम?
फैमिली टाइम बढ़ाएं: हफ्ते में एक दिन घर पर गेम्स या एक्टिविटी डे रखें।
आउटडोर गेम्स: बच्चों को बैडमिंटन, फ्रिसबी या क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित करें।
गार्डनिंग की आदत डालें: पौधों की देखभाल बच्चों को फिजिकल एक्टिव बनाएगी।
20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें: फोन या लैपटॉप की ब्राइटनेस को नियंत्रित रखें।
डिजिटल युग में स्क्रीन से दूरी बनाना भले ही मुश्किल हो, लेकिन थोड़ी सावधानी और संतुलन से बच्चों की आंखें, नींद और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है। स्क्रीन टाइम घटाना केवल आदत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक जरूरी निवेश है।

