द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा (गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल अप्रैल से शुरू होने वाली यह धार्मिक यात्रा अक्टूबर-नवंबर में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण रोक दी जाती है और सभी मुख्य धामों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। हालांकि, उत्तराखंड सरकार ने अब इस यात्रा को अलग अंदाज में करने का मौका दिया है, जिससे आप ठंड में भी इन पहाड़ी तीर्थस्थलों की यात्रा का अनुभव कर सकते हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो, मुख्य धामों के कपाट बंद होने के बाद उनके शीतकालीन निवास (Winter Seats) और संबंधित प्राचीन मंदिरों के दर्शन करके आप ‘शीतकालीन चार धाम यात्रा’ कर सकते हैं।
शीतकालीन चार धाम यात्रा: 4 प्रमुख प्राचीन मंदिर
उत्तराखंड सरकार की ओर से जोशीमठ, उखीमठ, मुखवा और खरसाली की यात्रा और यहां दर्शन का मौका दिया जा रहा है। ये मंदिर मुख्य धामों के प्रतिनिधि केंद्र माने जाते हैं।
| मंदिर का नाम | मुख्य धाम का शीतकालीन निवास | प्रमुख देवता | दिल्ली से दूरी (लगभग) |
| पांडुकेश्वर मंदिर | बद्रीनाथ | भगवान विष्णु (योग ध्यान बद्री) | 503.3 किलोमीटर |
| ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ | केदारनाथ | भगवान शिव | 436.6 किलोमीटर |
| ज्योतिर्मठ नरसिंह मंदिर | बद्रीनाथ यात्रा मार्ग | भगवान विष्णु (नरसिंह) | 488 किलोमीटर |
| मुखवा गांव | गंगोत्री | देवी गंगा | उत्तरकाशी के पास |
1. पांडुकेश्वर मंदिर: भगवान बद्रीनाथ का शीतकालीन निवास
स्थान और महत्व: पांडुकेश्वर जोशीमठ के पास स्थित प्रसिद्ध मंदिर है। बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर, भगवान बद्रीनाथ की मूर्ति को पांडुकेश्वर के योग ध्यान बद्री मंदिर में ही रखा जाता है।
पौराणिक मान्यता: माना जाता है कि यहां महाभारत के पिता राजा पांडु ने भगवान विष्णु की पूजा की थी, जिस वजह से इस जगह का नाम पांडुकेश्वर रखा गया।
दिल्ली से रूट: दिल्ली-हरिद्वार मार्ग और NH7 रास्ता लें (लगभग 503.3 किमी)। बस से जाने के लिए, दिल्ली के कश्मीरी गेट से ऋषिकेश के लिए बस लें और फिर वहां से पांडुकेश्वर के लिए दूसरी बस या टैक्सी लें।
2. ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर: केदारनाथ का आसन
स्थान और महत्व: ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जो उत्तराखंद के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।
शीतकालीन पूजा: जब शीतकालीन के दौरान केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं, तो मंदिरों की उत्सव मूर्तियों को यहां लाया जाता है और अगले छह महीने तक यहीं पूजा-अर्चना की जाती है।
मंदिर की सुंदरता: यह मंदिर अपनी जटिल पत्थरों की नक्काशी के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव ने तपस्या की थी।
दिल्ली से रूट: NH7 से होते हुए आप यहां पहुंच सकते हैं (लगभग 436.6 किमी)। बस के लिए कश्मीरी गेट से ऋषिकेश या देहरादून के लिए बस लें और वहां से सरकारी बस या टैक्सी से ओंकारेश्वर मंदिर पहुंच सकते हैं।
3. ज्योतिर्मठ नरसिंह मंदिर
स्थान और महत्व: ज्योतिर्मठ नरसिंह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है।
आकर्षण: मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, प्राचीन मूर्तियों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। यहां जाकर आप बादलों से घिरे नजारें भी देख सकते हैं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद भी ले सकते हैं।
दिल्ली से रूट: दिल्ली से इसकी दूरी 488 किलोमीटर है। कश्मीरी गेट से ऋषिकेश के लिए बस मिलेगी, जिसके बाद प्राइवेट टैक्सी लेकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
4. मुखवा गांव: देवी गंगा का शीतकालीन निवास
स्थान और महत्व: मुखवा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हर्षिल घाटी के पास स्थित एक छोटा सा गांव है। इसे गंगोत्री धाम का शीतकालीन निवास माना जाता है।
पूजा: जब गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं, तो यहां देवी गंगा की मूर्ति को स्थापित किया जाता है और 6 महीने तक यहीं पूजा-अर्चना की जाती है।
आकर्षण: इस गांव में आपको ट्रेडिशनल लकड़ी के घर देखने को मिलेंगे। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखने लायक होती है।
दिल्ली से रूट: कश्मीरी गेट से बस हरिद्वार तक जाती है। यहां से आप ऑटो या टैक्सी लेकर गांव तक पहुंच सकते हैं।
इन स्थानों की यात्रा करके आप न केवल धार्मिक आस्था पूरी कर सकते हैं, बल्कि शांत और बर्फीले पहाड़ों की खूबसूरती का भी आनंद ले सकते हैं।

