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Health Alert: जिन्हें आप समझते हैं हेल्दी ब्रेकफास्ट, वे शरीर के लिए हैं धीमा जहर; न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का बड़ा खुलासा

The loktnatra

द लोकतंत्र : भारतीय परिवेश में सुबह का नाश्ता दिन भर की ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत माना जाता है, किंतु नवीनतम स्वास्थ्य शोध एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स और कॉर्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, भारत के रसोई घरों में परोसे जाने वाले अधिकांश पारंपरिक नाश्ते पोषण के मानकों पर विफल सिद्ध हो रहे हैं। विख्यात कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. देवेश ने हाल ही में एक गहन विश्लेषण जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि कैसे चाय-बिस्कुट, पोहा और पराठे जैसे आम विकल्प शरीर में ग्लाइसेमिक लोड बढ़ाकर मेटाबॉलिक सिंड्रोम और कोलेस्ट्रॉल का जोखिम बढ़ा रहे हैं।

वैज्ञानिक तथ्य: मेटाबॉलिज्म पर प्रहार करते नाश्ते

विशेषज्ञों ने चार प्रमुख आहारों को ‘सबसे खराब नाश्ते’ की श्रेणी में रखा है:

  • चाय-बिस्कुट एवं रस्क: इसे ‘हल्का’ समझने की भूल सेहत पर भारी पड़ती है। मैदा और परिष्कृत चीनी (Refined Sugar) से निर्मित ये चीजें रक्त शर्करा (Blood Sugar) को तत्काल बढ़ाती हैं। इनमें फाइबर और प्रोटीन का अभाव होता है, जिससे अग्न्याशय (Pancreas) पर इंसुलिन बनाने का अत्यधिक दबाव पड़ता है।
  • पोहा और चाय: यद्यपि पोहा एक पारंपरिक विकल्प है, किंतु इसे चाय के साथ लेना हानिकारक हो सकता है। पोहा में उच्च कार्बोहाइड्रेट होता है और चाय के साथ इसका ग्लाइसेमिक लोड बढ़ जाता है, जो ग्लूकोज स्पाइक का कारण बनता है।

हृदय स्वास्थ्य पर संकट: वसा और ट्राईग्लिसराइड

सर्दियों में पराठा-मक्खन का सेवन एक सांस्कृतिक अभ्यास है, किंतु इसका जैविक प्रभाव चिंताजनक है।

  • पराठा और सब्जी: तेल या मक्खन में डूबे पराठे न केवल मोटापा बढ़ाते हैं, बल्कि रक्त में ट्राईग्लिसराइड और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को भी अनियंत्रित करते हैं।
  • ब्रेड-जैम: सफेद ब्रेड और जैम का कॉम्बिनेशन वस्तुतः चीनी और मैदे का जाल है। बच्चों के लिए यह नाश्ता शुरुआती उम्र में ही इंसुलिन रेसिस्टेंस पैदा कर सकता है।

वैकल्पिक समाधान: क्या हो आदर्श नाश्ता?

पोषण विशेषज्ञों का सुझाव है कि नाश्ते में ‘प्रोटीन और फाइबर’ की प्रधानता होनी चाहिए।

आदर्श नाश्ते के घटक:

  • प्रोटीन: अंडे, पनीर या अंकुरित अनाज।
  • जटिल कार्बोहाइड्रेट: ओट्स, दलिया या मल्टीग्रेन विकल्प।
  • स्वस्थ वसा: बादाम, अखरोट या अलसी के बीज।

स्वास्थ्य आउटलुक

  • यदि भारतीय खान-पान की आदतों में शीघ्र सुधार नहीं किया गया, तो भारत आने वाले दशकों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का वैश्विक केंद्र बन सकता है। डॉक्टरों की सलाह है कि ‘पेट भरने’ और ‘शरीर को पोषित करने’ के बीच के अंतर को समझना अनिवार्य है।

निष्कर्षतः, सुबह का नाश्ता स्वास्थ्य का निवेश है, खर्चा नहीं। सही चुनाव ही दीर्घायु और फुर्तीले जीवन की नींव है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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