द लोकतंत्र/ रायपुर : छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को समर्पित दो दिवसीय ‘आदि परब 2026’ का भव्य समापन नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास का नया दौर शुरू हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर लगभग चार दशकों तक नक्सल प्रभाव और विकास की कमी से जूझता रहा, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों के प्रयासों से क्षेत्र में शांति स्थापित हो रही है और जनजातीय समाज में भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ जल्द ही नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ेगा, जिससे आदिवासी समाज में अमन-चैन और समृद्धि का नया अध्याय शुरू होगा।
‘परंपरा से पहचान तक’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय कलाकारों ने अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की 43 जनजातियों का एक मंच पर आना सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए विभागीय टीम को बधाई दी और ‘आदि परब’ से जुड़ी चित्रकला और परिधानों को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज होने पर शुभकामनाएं दीं।
छात्रावास का लोकार्पण, जनजातीय युवाओं को शिक्षा का नया अवसर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनजातीय युवाओं को बेहतर शिक्षा और शोध के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय बहुल प्रदेश छत्तीसगढ़ में ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है, क्योंकि इससे समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के माध्यम से प्रदेश की 6691 जनजातीय बसाहटों के विकास के लिए कार्य कर रही है। इसके साथ ही ‘पीएम जनमन योजना’ के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना से राज्य की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने ‘नियद नेल्लानार योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। इससे इन इलाकों के लोगों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।
कार्यक्रम में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने भी जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने यूपीएससी परीक्षा में सफल जनजातीय समाज के विद्यार्थियों को सम्मानित किया और ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों के उन छात्रों को भी प्रोत्साहित किया जिनका चयन IIT और NIT में हुआ है। समारोह में जनजातीय इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन, पारंपरिक वेशभूषा में ‘अटायर शो’ और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनके माध्यम से छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराओं की समृद्ध झलक देखने को मिली।

