द लोकतंत्र : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की बदलती विकास कार्यसंस्कृति पर प्रशंसा व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से लंबित महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं ऊर्जा परियोजनाएं अब ‘प्रगति’ (PRAGATI) प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही हैं। यह आईसीटी आधारित प्रणाली न केवल परियोजनाओं की निगरानी कर रही है, बल्कि अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से बाधाओं का त्वरित समाधान भी सुनिश्चित कर रही है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में, भिलाई इस्पात संयंत्र और लारा पावर परियोजना इसके सफल क्रियान्वयन के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं।
प्रगति प्लेटफॉर्म: ₹85 लाख करोड़ की परियोजनाओं को संजीवनी
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति की 50वीं बैठक ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विकास की समीक्षा के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
- राष्ट्रीय प्रभाव: पिछले दशक में इस प्लेटफ़ॉर्म ने 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की गति को तेज किया है। इसमें रेल, सड़क, कोयला और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
- सहयोगी संघवाद: पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि इस प्रणाली ने केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों में विश्वास पैदा किया है, जिससे जटिल प्रशासनिक बाधाएं दूर हुई हैं।
छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख विकास स्तंभ
मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से दो परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है:
1. भिलाई इस्पात संयंत्र का कायाकल्प
- वर्ष 2007 में स्वीकृत आधुनिकीकरण कार्य जो मंदी का शिकार था, प्रगति की नियमित समीक्षा से अब पूर्णता की ओर है। इससे रेल उत्पादन में वृद्धि हुई है और क्षेत्रीय सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिला है। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में निर्णायक सिद्ध हो रहा है।
2. लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना
रायगढ़ स्थित एनटीपीसी की यह 1600 मेगावाट की परियोजना अब राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- इस परियोजना से छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों को निर्बाध बिजली मिल रही है। इसने राज्य की पहचान ‘पावर हब ऑफ इंडिया’ के रूप में पुख्ता की है, जिसका लाभ सीधे कृषि और औद्योगिक इकाइयों को मिल रहा है।
भविष्य का लक्ष्य: विकसित भारत @ 2047
- मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सक्रिय शासन के इस मॉडल से जवाबदेही तय हुई है। नियमित मॉनिटरिंग ने अधिकारियों और एजेंसियों को समयबद्ध परिणाम देने के लिए प्रेरित किया है। छत्तीसगढ़ अब औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन के मामले में राष्ट्रीय औसत को चुनौती देने के लिए तैयार है।
निष्कर्षतः, प्रगति प्लेटफ़ॉर्म केवल एक तकनीकी इंटरफ़ेस नहीं, बल्कि सुशासन का एक ऐसा दर्शन है जिसने ‘फाइलों के जंजाल’ से विकास को आजाद किया है। भिलाई और लारा जैसी परियोजनाओं की सफलता यह दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो तो दशकों पुरानी बाधाओं को भी पार किया जा कपट है। छत्तीसगढ़ निश्चित ही विकसित भारत के संकल्प में अपनी निर्णायक भूमिका निभाता रहेगा।

